धौलपुर: कड़ाके की ठंड और राजाखेड़ा के सुर्खा अमरूद की मिठास— सेहत और स्वाद का संगम

धौलपुर, जैसे-जैसे मरूधरा में सर्दी का सितम बढ़ रहा है, धौलपुर के बाजारों में अमरूद की खुशबू और मिठास ने आमजन को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से राजाखेड़ा उपखंड के अमरूद अपनी विशिष्ट रंगत और स्वाद के लिए जाने जाते हैं। कड़ाके की ठंड के बीच नमक और काली मिर्च के साथ अमरूद का लुत्फ उठाना अब धौलपुर वासियों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।


सेहत का खजाना: डॉ. धर्मेंद्र बंसल की राय

राजाखेड़ा के शहीद राघवेंद्र सिंह उप जिला स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ट फिजिशियन डॉ. धर्मेंद्र बंसल के अनुसार, सर्दियों में अमरूद का सेवन किसी औषधि से कम नहीं है।

अमरूद के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:

  • इम्यूनिटी बूस्टर: इसमें संतरे से भी अधिक विटामिन-सी होता है, जो सर्दी, जुकाम और फ्लू से लड़ने की शक्ति देता है।
  • पाचन में सुधार: प्रचुर मात्रा में मौजूद डाइटरी फाइबर कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर कर पाचन तंत्र को सुस्त होने से बचाता है।
  • शुगर और वेट कंट्रोल: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण यह डायबिटीज रोगियों के लिए सुरक्षित है और फाइबर की अधिकता वजन घटाने में मदद करती है।
  • मानसिक स्वास्थ्य: इसमें मौजूद मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और तनाव कम कर अच्छी नींद लाने में सहायक है।

बाजार का हाल: मांग में भारी उछाल

सर्दियों का सीजन शुरू होते ही धौलपुर जिले में अमरूद की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। बाजारों में अमरूद की आवक बढ़ने के बावजूद कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

खपत और कीमत का गणित:

  • राजाखेड़ा उपखंड: यहाँ प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 किलो अमरूद की खपत हो रही है।
  • धौलपुर जिला: पूरे जिले में रोजाना 8,000 से 9,000 किलो अमरूद बिक रहा है।
  • बाजार भाव: वर्तमान में अच्छी क्वालिटी के अमरूद की कीमत ₹65 से ₹80 प्रति किलो के बीच बनी हुई है।

विशेषज्ञों की सलाह: कैसे करें सेवन?

डॉक्टरों के अनुसार, अमरूद को छिलके और बीज सहित खाना ही सबसे अधिक गुणकारी है। इसे दोपहर के समय काला नमक या काली मिर्च के साथ खाना पाचन के लिए सर्वोत्तम है। हालांकि, रात के समय या भारी भोजन के तुरंत बाद इसके सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है।

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