मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का पुलिस मुख्यालय का दौरा, साइबर हेल्पलाइन 1930 पर लाइव कॉल्स सुनकर परखीं व्यवस्थाएं

जयपुर: राजस्थान में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर नकेल कसने और आमजन को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार अब पूरी तरह से गंभीर नजर आ रही है। गुरुवार को राजकीय अवकाश के दिन भी मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास एक्शन मोड में नजर आए। वे अचानक पुलिस मुख्यालय (PHQ) पहुंचे, जहां उन्होंने साइबर अपराध नियंत्रण एवं ‘साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930’ की कार्यप्रणाली को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली।

पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत ने मुख्य सचिव का स्वागत किया।

छुट्टी के दिन ढाई घंटे की मैराथन बैठक, सुने लाइव कॉल्स

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजकीय अवकाश होने के बावजूद अपना समय निकाला और पुलिस मुख्यालय में करीब ढाई घंटे से अधिक समय बिताया।

  • लाइव कॉल्स सुने: इस दौरान उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने वहां बैठकर ‘लाइव कॉल्स’ (Live Calls) को सुना और यह बारीकी से देखा कि किस प्रकार साइबर ठगी के शिकार लोगों की शिकायतें दर्ज हो रही हैं और एफआईआर (FIR) व जांच की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ रही है।
  • एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने उन्हें कॉल सेंटर की पूरी कार्यप्रणाली और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया।

हेल्पलाइन 1930 और R4C को लेकर 30 दिन का टारगेट

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी क्षमता और आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत करना समय की मांग है।

  • उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्पलाइन 1930 को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी बनाया जाए तथा इसके लिए अगले 30 दिनों में विस्तृत पॉलिसी प्लान (Policy Plan) के इम्प्लीमेंटेशन का लक्ष्य निर्धारित कर धरातल पर कार्यवाही की जाए।
  • साथ ही, राजस्थान साइबर क्राइम एंड ऑपरेशन सेंटर (R4C) को भी शीघ्र ही पूर्ण रूप से ऑपरेशनल (Operational) करने के निर्देश दिए गए, ताकि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया और तेज हो सके।

मुख्य सचिव द्वारा दिए गए प्रमुख और अहम निर्देश:

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने साइबर सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए कई बड़े फैसले लिए:

  1. ऑपरेटर्स की संख्या बढ़ेगी: साइबर अपराध के प्रत्येक पीड़ित को 1930 पर तुरंत रिस्पॉन्स मिले, इसके लिए टेलीफोन लाइनों और कॉल ऑपरेटरों की संख्या 15 जून तक बढ़ाई जाएगी।
  2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग: 1930 कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली को आधुनिक, प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने के लिए अब AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
  3. मंथली रिपोर्टिंग: गुणवत्ता सुधारने के लिए साइबर अपराध रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण की हर महीने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी।
  4. सोशल मीडिया पर अपडेट: प्रदेश के सभी साइबर थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन अपनी उपलब्धियों और की गई कार्रवाइयों की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए आमजन तक पहुंचाएं।
  5. खाता ब्लॉक होने के समय का विश्लेषण: साइबर ठगी की रिपोर्ट होने और बैंक खातों को ब्लॉक (Freeze) करने के बीच लगने वाले समय (Response Time) का गहन विश्लेषण किया जाएगा, ताकि ठगों के पैसे निकालने से पहले ही अकाउंट फ्रीज कर पीड़ित का पैसा बचाया जा सके।

41 साइबर थानों की होगी मासिक समीक्षा

मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी 41 साइबर सुरक्षा पुलिस स्टेशनों के बेहतर प्रदर्शन के लिए एक ‘मासिक समीक्षा व्यवस्था’ (Monthly Review System) विकसित की जाएगी। इसके अलावा संबंधित पुलिस अधिकारियों को अपडेट रखने के लिए विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सभी नई व्यवस्थाओं के लागू होने से अगले 30 दिनों में प्रदेश में साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में बेहद सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे।

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