बीसलपुर सिस्टम पर बड़ा अपडेट: 1889 करोड़ की नई पाइपलाइन अब 2500 करोड़ से ज्यादा में बिछेगी, DPR की रफ्तार भी धीमी

बीसलपुर जलापूर्ति सिस्टम को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित नई पाइपलाइन परियोजना की लागत अब पहले के अनुमान से काफी बढ़ती नजर आ रही है। राजस्थान सरकार ने बजट में सूरजपुरा से बालावाला तक नई पाइपलाइन बिछाने की घोषणा करीब 1889 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से की थी, लेकिन अब विभाग की विकास परियोजनाओं के लिए जारी नई बीएसआर के आधार पर लागत का दोबारा आकलन किए जाने पर यह खर्च 2500 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। लागत में इस बड़े इजाफे के बीच परियोजना की डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया की रफ्तार भी धीमी पड़ने की बात सामने आई है।

1889 करोड़ से बढ़कर 2500 करोड़ से ज्यादा हुआ अनुमान

बीसलपुर सिस्टम के तहत सूरजपुरा से बालावाला तक प्रस्तावित नई पाइपलाइन को जयपुर की भविष्य की पेयजल जरूरतों के लिहाज से अहम परियोजना माना जा रहा है। सरकार की बजट घोषणा के समय इस परियोजना की लागत करीब 1889 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, निर्माण सामग्री, मशीनरी और अन्य कार्यों की मौजूदा दरों को नई बीएसआर के आधार पर शामिल करने के बाद परियोजना की लागत में बड़ा अंतर सामने आया है।

विभागीय स्तर पर किए गए नए आकलन के अनुसार अब पूरी परियोजना की लागत 2500 करोड़ रुपये से अधिक बैठने की संभावना है। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में परियोजना पर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त खर्च आने की स्थिति बन रही है। लागत बढ़ने का असर परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।

डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया की रफ्तार हुई धीमी

परियोजना की लागत बढ़ने के बाद डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। डीपीआर किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें तकनीकी डिजाइन, लागत, क्षमता और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आकलन किया जाता है।

ऐसे में नई दरों के आधार पर लागत का पुनर्मूल्यांकन किए जाने से परियोजना की डीपीआर प्रक्रिया में समय लग रहा है। इसका सीधा असर परियोजना की शुरुआत और आगे बढ़ने वाली निर्माण प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

केवल 132 KV ग्रिड पर 100 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान

नई परियोजना में सिर्फ पाइपलाइन ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी बिजली और अन्य सहायक व्यवस्थाओं की लागत भी काफी बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 132 KV ग्रिड के निर्माण पर ही 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है।

इसके अलावा प्रस्तावित सिस्टम में फिल्टर प्लांट, पंप और अन्य मशीनरी की कीमतों में भी पिछले अनुमान की तुलना में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इन सभी घटकों की बढ़ी हुई लागत का असर पूरी परियोजना के बजट पर पड़ रहा है और इसी वजह से कुल लागत 2500 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

17 साल पुरानी पाइपलाइन पर बढ़ा दबाव

बीसलपुर जलापूर्ति सिस्टम की मौजूदा पाइपलाइन अब करीब 17 वर्ष पुरानी हो चुकी है। लंबे समय से इस्तेमाल में होने के कारण पाइपलाइन की स्थिति को लेकर भी चिंता सामने आ रही है। बीसलपुर प्रोजेक्ट विंग की ओर से तैयार रिपोर्ट में मौजूदा पाइपलाइन में 33 से अधिक लीकेज होने की जानकारी सामने आई है।

ऐसे में नई पाइपलाइन की जरूरत को जयपुर की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती पेयजल मांग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यदि पुरानी पाइपलाइन में लीकेज की समस्या बनी रहती है तो जलापूर्ति व्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है और पानी की बर्बादी के साथ-साथ सप्लाई सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ सकता है।

देरी का खमियाजा विभाग और शहर को उठाना पड़ सकता है

परियोजना की लागत बढ़ने और डीपीआर की प्रक्रिया धीमी होने से अब इसके क्रियान्वयन में और समय लगने की आशंका है। एक ओर जहां जयपुर शहर में पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा बीसलपुर सिस्टम पर निर्भरता भी बनी हुई है।

ऐसे में नई पाइपलाइन परियोजना में देरी का असर भविष्य की जलापूर्ति योजना पर पड़ सकता है। परियोजना जितनी देर से शुरू होगी, निर्माण लागत में और बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रह सकती है। इससे सरकार के सामने एक तरफ बढ़ती पेयजल जरूरतों को पूरा करने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ परियोजना के बढ़ते बजट को नियंत्रित करने का दबाव भी रहेगा।

जयपुर की जलापूर्ति के लिए क्यों अहम है परियोजना?

जयपुर की पेयजल व्यवस्था में बीसलपुर सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका है। शहर के बढ़ते विस्तार और आबादी के साथ पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुरानी पाइपलाइन और मौजूदा जलापूर्ति ढांचे को मजबूत करना भविष्य के लिए जरूरी माना जा रहा है।

सूरजपुरा से बालावाला तक प्रस्तावित नई पाइपलाइन इसी व्यापक जलापूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि परियोजना समय पर पूरी होती है तो भविष्य में जयपुर की बढ़ती पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बढ़ती लागत और डीपीआर तैयार करने की धीमी प्रक्रिया अब इस परियोजना के सामने बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है।

अब आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2500 करोड़ रुपये से अधिक की संभावित लागत वाली इस परियोजना को अंतिम रूप कब दिया जाएगा और संशोधित लागत को लेकर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाएगा। नई बीएसआर के आधार पर लागत का आकलन होने के बाद डीपीआर को अंतिम रूप देने और परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, बीसलपुर सिस्टम की पुरानी पाइपलाइन में सामने आए 33 से अधिक लीकेज और नई पाइपलाइन की बढ़ती लागत ने जयपुर की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में परियोजना की डीपीआर, संशोधित लागत और निर्माण की समयसीमा पर सभी की नजर रहेगी।


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