राजस्थान में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जालसाजों ने अब सीधे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया। ‘Expose Now’ के पास मौजूद दस्तावेज़ बताते हैं कि प्रदेश में 440 करोड़ रुपये का ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है, जिसने सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। यह सिर्फ ‘तकनीकी चूक’ नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण में फला-फूला एक ‘ऑर्गेनाइज्ड डिजिटल क्राइम’ है।
रात के अंधेरे में ‘खेती’, एक ही नंबर पर 2 लाख रजिस्ट्रेशन !
जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह है डिजिटल सेंधमारी। जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब जालसाज ‘किसान’ बनकर सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर रहे थे। एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके 2.15 लाख रजिस्ट्रेशन कर दिए गए। इनमें से 95% डेटा फर्जी पाया गया है, जिससे अकेले 213 करोड़ रुपये की चपत लगी। आईडी हैक का खेल: शाहपुरा और अन्य क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों की आईडी हैक कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
सरकारी फाइलों में दफन हैं गुनहगार: 4 लाख संदिग्ध खाते
सर्वे की रिपोर्ट ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर प्रदेश में करीब 6 लाख ऐसे लाभार्थियों को चिन्हित किया है, जो वास्तव में किसान हैं ही नहीं। प्रशासन के सर्वे में सामने आया है कि 4 लाख से अधिक डेटा संदिग्ध है। गड़बड़ी उजागर होते ही सरकार ने इन 6 लाख खातों की किस्तें तुरंत प्रभाव से रोक दी हैं। अब केंद्र सरकार इनके ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ के लिए नई SOP तैयार कर रही है।
SOG की एंट्री: झालावाड़ से लेकर पाली तक फैला जाल-
इस महाघोटाले की परतें खोलने के लिए अब SOG (Special Operations Group) ने कमान संभाल ली है। झालावाड़ कनेक्शन: झालावाड़ में दर्ज FIR को अब SOG को ट्रांसफर कर दिया गया है। थानों में धूल फांकती फाइलें: जालौर, अलवर, पाली (देसूरी, रानी) और मारवाड़ जंक्शन जैसे इलाकों में हजारों फर्जी किसानों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिसिया सुस्ती के कारण अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
Expose Now का सवाल: किसका था संरक्षण?
तने बड़े पैमाने पर डेटा की हेराफेरी बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। ‘Expose Now’ पूछता है:-
सरकारी आईडी हैक होने के बावजूद विभाग इतने सालों तक चुप क्यों रहा?
एक ही नंबर से 2 लाख रजिस्ट्रेशन होने पर पोर्टल के ‘अलर्ट सिस्टम’ ने काम क्यों नहीं किया?
क्या केवल किश्तें रोक देना काफी है? उन जालसाजों से 440 करोड़ की वसूली कब होगी?
