राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा अपनी गिरफ्तारी के पौने तीन साल बीत जाने के बाद भी तकनीकी रूप से पद पर बना हुआ है। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 के पेपर लीक मामले में जेल की हवा खा रहे कटारा को पद से हटाना अब राजस्थान सरकार, राजभवन और राष्ट्रपति के बीच एक लंबी विधिक प्रक्रिया में उलझ गया है। जहाँ एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी है, वहीं उसकी बर्खास्तगी पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
सरकारी आवास पर लिखी गई ‘बर्बादी’ की इबारत
एसओजी (SOG) की जांच में जो तथ्य सामने आए, वे प्रदेश के परीक्षा तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं। जांच के अनुसार, कटारा ने अपने सरकारी आवास पर ही प्रश्न पत्र लीक किया था। उसने अपने भांजे विजय डामोर के जरिए पेपर को एक रजिस्टर में लिखवाया। यह पेपर सबसे पहले 60 लाख रुपये में बेचा गया और बाद में मुख्य आरोपी भूपेंद्र सारण के साथ इसकी डील 80 लाख रुपये में फाइनल हुई थी।
संवैधानिक पेच: क्यों नहीं हो रही बर्खास्तगी?
आरपीएससी के अध्यक्ष या सदस्यों को पद से हटाना साधारण सरकारी प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे संविधान का अनुच्छेद 317 एक मजबूत कवच की तरह खड़ा है:
- राष्ट्रपति का अधिकार: आयोग के सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से ही बर्खास्त किया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का रेफरेंस: गंभीर कदाचार के मामले में राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय को मामला भेजना पड़ता है। वहां से विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बर्खास्तगी संभव है।
- वर्तमान स्थिति: राज्य सरकार ने 2 वर्ष पूर्व ही राष्ट्रपति और राज्यपाल को बर्खास्तगी का प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन यह अभी भी प्रक्रियाधीन है।
60 फीसदी अधिक संपत्ति और ED की एंट्री
एसीबी (ACB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कटारा का काला चिट्ठा और गहरा गया है। जांच के दौरान कटारा के पास आय से 60 फीसदी अधिक संपत्ति पाई गई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि उसके पास से 51.20 लाख रुपये नकद और 500 ग्राम से अधिक सोने के आभूषण बरामद हुए हैं।
ट्रायल में देरी और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में बताया कि कटारा बार-बार ट्रायल को स्थगित करवाकर देरी कर रहा है। उसके खिलाफ कुल 5 आपराधिक मामले लंबित हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उसके द्वारा तथ्यों को छिपाने की बात कहते हुए उसकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे अब उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
