दक्षिण अमेरिका में धोली मीणा का ऐतिहासिक ‘सांस्कृतिक शंखनाद’: इक्वाडोर में पहली बार मना ‘राजस्थान दिवस’

क्विटो (इक्वाडोर)। सात समंदर पार दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के इक्वाडोर में मरुधरा की संस्कृति का जादू सिर चढ़कर बोला। राजस्थान की बेटी धोली मीणा के विशेष प्रयासों और इक्वाडोर में भारत के कार्यकारी राजदूत लोकेश कुमार मीणा के कुशल नेतृत्व में पहली बार ‘राजस्थान दिवस 2026’ का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। भारतीय दूतावास क्विटो द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “पधारो म्हारे देश” रखी गई, जिसने विदेशी मेहमानों को राजस्थान की राजसी विरासत से रूबरू कराया।

वैश्विक मंच पर उमड़ा राजनयिकों का हुजूम

इस सांस्कृतिक महाकुंभ में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सहभागिता देखने को मिली। समारोह में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, स्विट्जरलैंड और जर्मनी के राजदूतों सहित कई देशों के वरिष्ठ राजनयिक और इक्वाडोर सरकार के आला अधिकारी शामिल हुए। भारतीय समुदाय और भारत प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक वैश्विक उत्सव में बदल दिया।

कालबेलिया और घूमर की थाप पर थिरके विदेशी मेहमान

कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी राजदूत लोकेश कुमार मीणा के संबोधन से हुई, जिसके बाद राजस्थान के लोक रंगों की झड़ी लग गई:

  • कालबेलिया नृत्य: कलाकारों की चुस्ती और हैरतअंगेज फुर्ती ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
  • घूमर: पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं द्वारा प्रस्तुत घूमर ने राजस्थान की गरिमा को जीवंत कर दिया।
  • टूरिज्म फिल्म: राजस्थान पर्यटन विभाग की विशेष फिल्म के जरिए किलों, महलों और सुनहरे रेगिस्तान के दर्शन कराए गए, जिसे देख मेहमानों में राजस्थान भ्रमण की उत्सुकता जाग उठी।

दाल-बाटी-चूरमा के मुरीद हुए विदेशी

राजस्थानी मेहमाननवाजी के बिना कोई भी उत्सव अधूरा है। कार्यक्रम में अतिथियों को पारंपरिक राजस्थानी भोजन परोसा गया। दाल-बाटी-चूरमा और अन्य जायकेदार व्यंजनों का स्वाद चखकर विदेशी मेहमान गदगद हो उठे।

“राजस्थान भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह आयोजन भारत और इक्वाडोर के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।” — लोकेश कुमार मीणा, कार्यकारी राजदूत

आयोजक धोली मीणा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और प्रगति पर प्रकाश डाला। यह सफल आयोजन ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ की एक उत्कृष्ट मिसाल बनकर उभरा है, जिसने वैश्विक स्तर पर ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ की साख को और मजबूती दी है।

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