जयपुर: राजधानी जयपुर में फ्लैट बुक कराने वाले आम खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के आवासीय प्रोजेक्ट्स का पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
न्यायाधीश गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तक मौके पर जाकर सत्यापन की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कोई भी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी न किया जाए।
क्या है पूरा मामला और किसने लगाई गुहार?
यह आदेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश कुमार साहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया।
- अधूरा है प्रोजेक्ट: याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सिद्धार्थ नगर स्थित ‘जयपुर मोटल्स एंड बिल्ड स्टेट्स’ के प्रोजेक्ट में एक फ्लैट बुक कराया था।
- मिलीभगत का आरोप: आरोप है कि बिल्डर द्वारा जेडीए और अधिकृत आर्किटेक्ट (मैसर्स तुषार सोगानी डिजाइन प्रा. लि.) के साथ मिलीभगत करके प्रोजेक्ट का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
- मौके की हकीकत: जब याचिकाकर्ता ने खुद मौके पर जाकर देखा, तो पाया कि प्रोजेक्ट में अभी काफी निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन (Incomplete) है। इसकी शिकायत जेडीए और आर्किटेक्ट से की गई, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अब अगली सुनवाई 25 मार्च तक के लिए टाल दी है और जेडीए को पाबंद किया है।
पर्दे के पीछे का सच: क्या है ‘ब्याज से बचने का खेल’?
आखिर अधूरे प्रोजेक्ट्स का पूर्णता प्रमाण पत्र लेने की होड़ क्यों मची है? वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश कुमार साहनी ने इस पूरे ‘खेल’ की पोल खोलते हुए बताया:
- रेरा (RERA) का नियम: रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के नियमों के अनुसार, बिल्डर को तय समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा करके पूर्णता प्रमाण पत्र पेश करना होता है।
- पेनल्टी से बचने की जुगत: यदि निर्माण में देरी होती है, तो बिल्डर को खरीदारों और रेरा को भारी ब्याज (Interest) या पेनल्टी का भुगतान करना पड़ता है।
- कागजों में ‘पूरा’ प्रोजेक्ट: इसी ब्याज और पेनल्टी से बचने के लिए बिल्डर विकास प्राधिकरण (JDA) और अधिकृत आर्किटेक्ट्स के साथ ‘सेटिंग’ करके कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर पूर्णता प्रमाण पत्र हासिल कर लेते हैं।
इस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा खामियाजा उस आम आदमी को भुगतना पड़ता है, जिसने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई फ्लैट में लगाई है। फ्लैट बुक कराने वाला व्यक्ति मौके पर प्रोजेक्ट अधूरा होने के कारण बरसों तक कब्जा (Possession) लेने के लिए दर-दर भटकता रहता है।
