(ब्यूरो रिपोर्ट / अलवर-जयपुर): अलवर जिले के टहला थाना क्षेत्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एसीबी टीम ने एक पुलिस कांस्टेबल को 10 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह घूसखोरी एक मुकदमे में हुए राजीनामे को पत्रावली पर लेने की एवज में चल रही थी। इस पूरे भ्रष्टाचार का खेल थाने के हेड कांस्टेबल के इशारे पर चलता मिला, जो कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया।
राजीनामा बना घूस का हथियार
गोला का बास निवासी नरसीराम मीणा ने 6 मार्च 2026 को दौसा एसीबी कार्यालय में एक शिकायत दी थी। परिवादी के परिजनों के खिलाफ टहला थाने में एक मुकदमा दर्ज था, जिसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी राजीनामा हो गया। परिवादी जब यह राजीनामा लेकर जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रामनारायण के पास पहुंचा, तो उसने इसे फाईल पर लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया। आरोपी जांच अधिकारी ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी और यह पूरी रकम गोला का बास चौकी पर तैनात कांस्टेबल रामप्रकाश को सौंपने का निर्देश दिया।
होटल के कमरे में हुई सौदेबाजी
शिकायत का गोपनीय सत्यापन उसी दिन परिवादी के होटल पर किया गया। कांस्टेबल रामप्रकाश 15 हजार रुपये में सौदा तय करके 5 हजार रुपये मौके पर ही ले गया। इसके बाद 11 मार्च 2026 को एसीबी टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। परिवादी ने अपने होटल के कमरे में कांस्टेबल रामप्रकाश को शेष 10 हजार रुपये की रिश्वती राशि सौंपी।
इशारे पर एसीबी का सटीक एक्शन
रिश्वत का लेन-देन होते ही परिवादी ने कमरे से बाहर आकर टीम को इशारा किया। इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने मौके पर दबिश दी और आरोपी कांस्टेबल को धर दबोचा। तलाशी के दौरान रिश्वत की रकम उसकी पैंट की बायीं जेब से बरामद हुई।
भनक लगते ही मुख्य आरोपी फरार
गिरफ्तारी के बाद आरोपी कांस्टेबल ने पूछताछ में कबूल किया कि यह रकम उसने हेड कांस्टेबल रामनारायण के कहने पर प्राप्त की थी। एसीबी ने फोन पर दोनों आरोपियों की बात भी करवाई, जिससे हेड कांस्टेबल की संलिप्तता पूरी तरह प्रमाणित हो गई। एसीबी की टीम जब हेड कांस्टेबल रामनारायण को पकड़ने के लिए टहला थाने पहुंची, तो वह वहां से भागने में सफल रहा। अब एसीबी ने दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया और इस प्रकरण की अग्रिम जांच अलवर-प्रथम के डीएसपी शब्बीर अहमद को सौंप दी।
