राजस्थान शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: गर्मियों की छुट्टियों में 10 दिन की कटौती, सरकार पर आएगा ₹270 करोड़ का भारी बोझ

जयपुर | राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा नए शैक्षणिक सत्र को 1 अप्रैल से शुरू करने के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) में 10 दिनों की कटौती करने का निर्णय लिया गया है। विभाग का यह फैसला अब सरकार की जेब पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। नियमों के तकनीकी पेंच के कारण, छुट्टियों के बदले शिक्षकों को करीब 270 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है।

RSR नियमों का ‘गणित’ और अतिरिक्त भुगतान

राजस्थान शिक्षा सेवा नियमों (RSR) के प्रावधानों के अनुसार, शिक्षकों के लिए 17 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित रहता है। नियमानुसार, यदि किसी शिक्षक को अवकाश के दौरान काम पर बुलाया जाता है, तो हर 3 दिन की ड्यूटी के बदले 1 उपार्जित अवकाश (PL) देय होता है।

  • कटौती: 10 दिन (अब शिक्षकों को 21 जून से ही स्कूल बुला लिया जाएगा)।
  • अतिरिक्त PL: 10 दिन की कटौती के बदले प्रत्येक शिक्षक को लगभग 3 पीएल (PL) अतिरिक्त देनी होगी।
  • वित्तीय भार: एक पीएल की औसत कीमत लगभग 3,000 रुपये मानी जाती है। इस हिसाब से एक शिक्षक को करीब 9,000 रुपये का भुगतान करना होगा। प्रदेश के लगभग 3 लाख शिक्षकों के लिए यह कुल राशि 270 करोड़ रुपये बैठती है।

शिविरा पंचांग और नियमों में तालमेल की कमी

हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग ने 1 अप्रैल से नया सत्र तो घोषित कर दिया, लेकिन अभी तक आधिकारिक ‘शिविरा पंचांग’ में संशोधन नहीं किया है। पंचांग के अनुसार अभी भी छुट्टियाँ 30 जून तक ही दर्शाई गई हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि राजस्थान सर्विस रूल्स (RSR) में संशोधन किए बिना छुट्टियों में कटौती करना नियमों के विरुद्ध है और इससे सरकार पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ेगा।

अटकी हुई योजनाओं पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का तर्क है कि जहां सरकार ₹270 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान पीएल के रूप में करने जा रही है, वहीं विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाएं बजट के अभाव में दम तोड़ रही हैं:

  • टैबलेट योजना: इसके लिए मात्र ₹30 करोड़ की आवश्यकता है।
  • कंपोजिट ग्रांट: सरकारी स्कूलों के लिए ₹200 करोड़ का भुगतान बकाया है।
  • RTE पुनर्भरण: निजी स्कूलों की फीस के लिए ₹500 करोड़ से अधिक की जरूरत है।
  • RTE छात्र सहायता: कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए ₹300 करोड़ का बजट अटका हुआ है।

भीषण गर्मी और शिक्षकों का विरोध

अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ और अन्य संगठनों ने इस फैसले का विरोध जताया है। शिक्षकों का कहना है कि जून के महीने में तापमान चरम पर रहता है, ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा। साथ ही, बिना बजट प्रावधान के इस तरह का अतिरिक्त भार डालना प्रशासन की अदूरदर्शिता को दर्शाता है।

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