अलवर: राजस्थान का ऐतिहासिक शहर अलवर शनिवार को देश के वन्यजीव संरक्षण की नई नीतियों का केंद्र बना। होटल प्राइड प्रीमियर में आयोजित दो-दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने देशभर के 58 टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर्स और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन्स के साथ ‘प्रोजेक्ट टाइगर 2.0’ के रोडमैप पर चर्चा की। इस दौरान मंत्री यादव ने भारत के बाघ संरक्षण मॉडल को वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बताते हुए कहा कि बाघ केवल एक जानवर नहीं, बल्कि हमारे पूरे इकोसिस्टम की सुरक्षा की गारंटी है।
अतिक्रमण और टकराव को रोकने का नया प्लान

कॉन्फ्रेंस के दौरान वन्यजीव संरक्षण की राह में आने वाली कड़वी सच्चाइयों और चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में 5 प्रमुख फैसलों पर व्यापक सहमति बनी है, जो भविष्य की टाइगर पॉलिसी का आधार बनेंगे:
- अतिक्रमण और अवैध शिकार पर प्रहार: टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बढ़ते अतिक्रमण को सख्ती से हटाने और शिकार रोकने के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करना।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान: रिज़र्व क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और बाघों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए प्रभावी बफर जोन मैनेजमेंट।
- मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी: वन्यजीवों द्वारा पशुओं या जनहानि होने पर मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और त्वरित बनाना।
- हाईटेक निगरानी तंत्र: सैटेलाइट ट्रैकिंग और ड्रोन के जरिए बाघों की 24×7 मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक तकनीक (AI आधारित) का उपयोग।
- जिम्मेदार ईको-टूरिज्म: पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा देना, ताकि स्थानीय समुदायों को रोजगार मिले और वे संरक्षण में भागीदार बनें।
बाघ सुरक्षित तो भविष्य सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया कि बाघों की बढ़ती संख्या हमारी पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का प्रमाण है। इस बैठक से निकलने वाला ‘ब्लूप्रिंट’ न केवल बाघों की आबादी बढ़ाने में मददगार होगा, बल्कि वन विभाग के फील्ड स्टाफ को और अधिक अधिकार देकर उन्हें सशक्त भी बनाएगा। 8 फरवरी को इस मिशन के समापन पर आयोजित होने वाली ‘अलवर टाइगर मैराथन’ के जरिए जनता को भी इस संरक्षण अभियान से जोड़ा जाएगा।
