दुर्गम क्षेत्रों में खुलेंगे नए न्यायालय: विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने विधानसभा में दी जानकारी

जयपुर, राजस्थान के विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को विधानसभा में न्याय व्यवस्था को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों को न्याय के लिए दूर न भटकना पड़े, इसके लिए सरकार नए न्यायालय खोलने की दिशा में गंभीर है।

उपलब्ध संसाधनों और उच्च न्यायालय की अनुमति पर निर्भरता

प्रश्नकाल के दौरान आसींद विधायक जब्बर सिंह सांखला द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि नए सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय (मुंसिफ कोर्ट) खोलने की प्रक्रिया दो मुख्य कारकों पर टिकी है:

  1. राज्य सरकार के पास उपलब्ध वित्तीय एवं भौतिक संसाधन
  2. माननीय उच्च न्यायालय की आवश्यक अनुमति और परामर्श।

उन्होंने कहा कि सरकार आमजन को त्वरित, सुलभ और निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।


बदनोर में फिलहाल कोर्ट नहीं: निर्धारित मापदंडों का हवाला

विधायक द्वारा बदनोर में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने लिखित जवाब में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि फिलहाल बदनोर में नया न्यायालय खोलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जिसका मुख्य कारण लंबित मामलों की कम संख्या है।

न्यायालय स्थापना के नियम:

  • राज्य सरकार का मापदंड: एक नए सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय की स्थापना के लिए उस क्षेत्र में कम से कम 1700 से 2000 प्रकरण लंबित होने चाहिए।
  • बदनोर की स्थिति: वर्तमान में बदनोर क्षेत्र के लिए केवल 812 प्रकरण ही लंबित हैं, जो निर्धारित मापदंडों के आधे से भी कम हैं।

विधि मंत्री ने आश्वस्त किया कि भविष्य में जैसे ही मापदंड पूरे होंगे और संसाधन उपलब्ध होंगे, प्राथमिकता के आधार पर ऐसे क्षेत्रों में न्यायिक विस्तार किया जाएगा।

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