JLF: ‘भारतीय समाज प्रगति तो चाहता है, पर परिवर्तन नहीं’, चारबाग सत्र में छिड़ी Gen Z और मिलेनियल्स पर बहस

जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के ‘चारबाग’ प्रांगण में आयोजित ‘जेन Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी’ सत्र के दौरान भारतीय समाज की बदलती परतों, डिजिटल क्रांति और पीढ़ीगत संघर्ष पर तीखी और दिलचस्प चर्चा हुई। इस सत्र में लेखक संतोष देसाई, डिजिटल क्रिएटर अनुराग माइनस वर्मा और रिया चोपड़ा ने चिराग ठक्कर के साथ संवाद किया।

प्रगति की चाहत, लेकिन बदलाव से परहेज: संतोष देसाई

प्रसिद्ध सामाजिक टिप्पणीकार संतोष देसाई ने भारतीय मानस की एक गहरी विसंगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता परिवर्तन का विरोध करने की उसकी क्षमता है। भारत एक ऐसी महाशक्ति है जो प्रगति तो चाहता है, विकास की आवाजें सुनना चाहता है, लेकिन अपने मूल ढांचे में परिवर्तन नहीं चाहता। यही आज के भारत का केंद्रीय मुद्दा है।”

राजनीति और संस्थाओं के गिरते स्तर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य कभी समाज को बदलना था, लेकिन आज समाज ने राजनीति को ही बदल दिया है। यहाँ तक कि न्यायपालिका (ज्यूडिशरी) जैसे संस्थान भी अब इस प्रभाव से अछूते नहीं हैं।

‘परमाक्राइसिस’ के दौर में जी रही है नई पीढ़ी: रिया चोपड़ा

मिलेनियल्स और जेन ज़ी (Gen Z) के नजरिए को साझा करते हुए रिया चोपड़ा ने कहा कि आज की पीढ़ी ‘परमाक्राइसिस’ (स्थाई संकट) की स्थिति में जी रही है।

  • प्रणालियों की विफलता: रिया के अनुसार, स्वास्थ्य, राजनीति और जलवायु परिवर्तन जैसे मोर्चों पर सिस्टम पूरी तरह विफल रहा है।
  • दिल्ली का प्रदूषण एक मिसाल: उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है लेकिन कोई समाधान नहीं दिख रहा।
  • एकजुटता की क्रांति: जब युवाओं को लगता है कि कोई भी व्यवस्था उनके लिए काम नहीं कर रही, तब वे खुद एकजुट होकर उन प्रणालियों के खिलाफ खड़े होते हैं। यही ‘जेन Z’ की क्रांति का मूल आधार है।

टेलर स्विफ्ट बनाम सपना चौधरी: जेन Z की कोई एक परिभाषा नहीं

कंटेंट क्रिएटर अनुराग माइनस वर्मा ने ‘जेन Z’ को एक ही चश्मे से देखने की धारणा को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि भारत में वर्ग और जाति के आधार पर युवाओं की दुनिया अलग-अलग है।

“दिल्ली का कोई युवा अगर टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट के लिए बेताब है, तो राजस्थान का युवा सपना चौधरी को सुनना चाहता है। मुंबई का युवा जोहरान ममदानी का दीवाना हो सकता है, तो राजस्थान में कोई अशोक गहलोत का।” — अनुराग माइनस वर्मा

अनुराग ने तर्क दिया कि चूंकि हर राज्य का जातिगत और वर्गीय दृष्टिकोण अलग है, इसलिए एक ‘राष्ट्रीय क्रांति’ की उम्मीद करना मुश्किल है। हालांकि, उन्होंने राजस्थान और बिहार में पेपर लीक के खिलाफ हुए युवाओं के आंदोलन को ‘जेन Z’ की असली क्रांति बताया। उन्होंने अफसोस जताया कि ये आंदोलन व्यवस्था के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन ‘ग्लैमरस’ न होने के कारण अक्सर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पाते।

Share This Article
Leave a Comment