जयपुर: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) में हुए 2500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के बाद जलदाय विभाग (PHED) ने व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की तैयारी कर ली है। विभाग ने अब इंसानी दखल कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत IT सिस्टम पर भरोसा जताया है।
भ्रष्टाचार पर ‘डिजिटल’ प्रहार: 50 करोड़ का नया खाखाजलदाय विभाग ने पाइपलाइन बिछाने, टंकियों के निर्माण और ट्यूबवेल खोदने जैसे कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा है। इस सिस्टम को तैयार करने में लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सिस्टम की मुख्य विशेषताएं:ऑनलाइन एमबी और पेमेंट: प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर अंतिम भुगतान (M-Book भरने तक) की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।रियल-टाइम अपडेट: सब-डिवीजन स्तर पर ठेकेदार द्वारा किए गए काम की जानकारी तुरंत पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
जियो-टैगिंग और फोटो: हर काम की लोकेशन (Geo-tagging) और उसकी तस्वीरें अनिवार्य रूप से ऑनलाइन अपलोड करनी होंगी।
पाइप चोरी पर लगाम: AI आधारित यह सिस्टम पाइपलाइन की चोरी या सामग्री में हेरफेर को तुरंत पकड़ लेगा।
क्यों पड़ी तकनीक की जरूरत?
हाल ही में हुए घोटाले में यह सामने आया कि ठेका फर्मों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिना काम किए ही भुगतान उठा लिया गया। कई स्थानों पर पाइपलाइन कागजों में तो बिछ गई, लेकिन जमीन पर गायब थी।
घोटाले के प्रमुख तरीके:फर्जी प्रमाण पत्र: ठेका हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों का उपयोग।
घटिया सामग्री: बोरिंग और पाइपलाइन में निम्न स्तर के पाइपों का इस्तेमाल।
एडवांस पेमेंट: काम शुरू होने से पहले ही नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान।
डिजाइन में बदलाव: ओवरहेड टैंकों के ड्राइंग-डिजाइन में बिना अनुमति फेरबदल।
एसीबी और ईडी की जांच जारीइस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार जारी है। पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार पहले ही रडार पर हैं। हाल ही में, सरकार ने कई उच्चाधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति भी दी है।
“अब अधिकारियों को फील्ड में जाने की जरूरत नहीं होगी। दफ्तर में बैठकर ही स्क्रीन पर यह देखा जा सकेगा कि किस प्रोजेक्ट में कितना काम हुआ है। इससे न केवल गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि जनता के पैसे की पाई-पाई का हिसाब रहेगा।” — विभागीय सूत्र, PHED
