राजस्थान में MSME और हस्तशिल्पियों की चमकेगी किस्मत: सरकार देगी 58 करोड़ का अनुदान, 9 जिलों में बनेंगे ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा हस्तशिल्पियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। एकीकृत क्लस्टर विकास योजना के तहत राज्य सरकार तकनीकी उन्नयन और मशीनों के लिए 58 करोड़ रुपये का भारी अनुदान प्रदान करेगी।

उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने बताया कि इस योजना के तहत प्रदेश के 9 जिलों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित किए जाएंगे, जिससे 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों और सैकड़ों दस्तकारों को सीधा लाभ मिलेगा।

किन जिलों में बनेंगे कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC)?

राज्य सरकार ने क्लस्टर आधारित विकास के लिए 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन जिलों में आधुनिक मशीनों से लैस केंद्र बनाए जाएंगे:

  • भरतपुर और दौसा: पत्थर की नक्काशी (Stone Carving) के लिए आधुनिक मशीनें लगेंगी।
  • बालोतरा (बाड़मेर): टेक्सटाइल प्रोसेसिंग के लिए वाटर जेट लूम्स और वारपिंग मशीनें स्थापित होंगी।
  • हनुमानगढ़: कृषि उपकरण बनाने वाली इकाइयों के लिए लेजर कटिंग और वेल्डिंग मशीनें मिलेंगी।
  • कोटपूतली-बहरोड़: इंजीनियरिंग फैब्रिकेशन के लिए सीएनसी और फाइबर लेजर मशीनें लगेंगी।
  • फलोदी: सोनामुखी (Senna) प्रसंस्करण के लिए ऑटोमैटिक प्रोसेस चेन बनेगी।
  • जयपुर: रजाई और होम फर्निशिंग उत्पादों के लिए आधुनिक मशीनरी लगाई जाएगी।

300 दस्तकारों को मिलेगा 100% अनुदानित प्रशिक्षण

योजना के तहत केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है।

  • जयपुर और चूरू: लेदर जूती, चप्पल और बैग बनाने वाले 200 दस्तकारों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • झुंझुनू: गोटा-जरी का काम करने वाली 100 महिलाओं को विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • प्रशिक्षण का पूरा खर्च (लगभग 1.18 करोड़ रुपये) राज्य सरकार वहन करेगी।

योजना की खास बातें और पात्रता

विशेषताविवरण
अनुदान राशिकुल 69 करोड़ के प्रोजेक्ट में 58 करोड़ रुपये सरकारी सहायता।
पात्रताएक ही स्थान पर कार्यरत कम से कम 20 समान उत्पादन वाली इकाइयां।
आवेदन प्रक्रियाकम से कम 10 इकाइयों को मिलकर एक अलाभकारी कंपनी (SPV) बनानी होगी।
लक्ष्यअगले 3 वर्षों में राज्य में 50 क्लस्टर विकसित करना।

रोजगार और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

आयुक्त सुरेश कुमार ओला के अनुसार, इन केंद्रों के बनने से उत्पादन की गुणवत्ता सुधरेगी और ‘वेस्ट’ (अपशिष्ट) में 15% तक की कमी आएगी। इससे स्थानीय उत्पादों की देश-विदेश में मांग बढ़ेगी, जिससे न केवल दस्तकारों की आय दोगुनी होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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