राजस्थान डिजिफेस्ट 2026: ‘एआई इंसान की रचनात्मकता का सहयोगी है, विकल्प नहीं’ — विशेषज्ञों ने तकनीक और कंटेंट क्रिएशन पर रखा विजन

जयपुर, जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 के अंतिम दिन ‘रिइमेजनिंग कॉन्टेंट क्रिएशन थ्रू टेक्नोलॉजी’ विषय पर एक ज्ञानवर्धक पैनल चर्चा आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकें मानवीय रचनात्मकता को प्रतिस्थापित नहीं करेंगी, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने में उत्प्रेरक का कार्य करेंगी।

तकनीक: कहानी कहने का आधुनिक औजार

मुग्धा हॉल में आयोजित इस सत्र में प्राइमस पार्टनर्स के रौनक सिंघवी ने अन्नपूर्णा स्टूडियोज के सीटीओ सी.वी. राव और फ्राइडे फिल्मवर्क्स के को-फाउंडर देवेन्द्र देशपांडे के साथ संवाद किया। चर्चा के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

  • क्रिएटिविटी बनाम एल्गोरिदम: विशेषज्ञों ने कहा कि रचनात्मकता एक मौलिक मानवीय गुण है जो ‘आश्चर्य’ और ‘मौलिकता’ पर आधारित है, जबकि तकनीक पूर्वानुमानों पर काम करती है।
  • लोकतांत्रिक हुआ कंटेंट क्रिएशन: वर्चुअल प्रोडक्शन, बेहतर विजुअलाइजेशन और बजट अनुकूलन जैसे एआई टूल्स ने कंटेंट बनाने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना दिया है। अब छोटे क्रिएटर्स भी उच्च स्तरीय वीएफएक्स-आधारित प्रोडक्शन कर पा रहे हैं।
  • समय और लागत की बचत: एआई वर्कफ्लो को सुव्यवस्थित कर जटिल पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों की डिलीवरी को तेज और किफायती बना रहा है।

डेटा और मानवीय निर्णय

पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि डेटा क्रिएटिव निर्णयों में सहायता तो कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा मानवीय दृष्टिकोण (Human Perspective) का ही होना चाहिए। तकनीक ओटीटी (OTT) और सिनेमाई अनुभवों को समृद्ध तो बना रही है, लेकिन कहानी कहने की कला का केंद्र हमेशा मानवीय संवेदना ही रहेगी।


प्रमुख विशेषताएँ (Highlights):

  • सहयोग, प्रतिस्थापन नहीं: एआई का उपयोग इंसानी कल्पना को पंख देने के लिए किया जा रहा है।
  • वर्चुअल प्रोडक्शन: तकनीक ने बड़े बजट वाले दृश्यों को छोटे स्टूडियो में संभव बनाया।
  • लोकतांत्रीकरण: तकनीक ने उभरते कलाकारों के लिए कंटेंट निर्माण को सस्ता और आसान बनाया।

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