सिस्टम की बड़ी लापरवाही: उम्रकैद का कैदी लग्जरी कार से करता रहा तस्करी, 5 दिन विदेश घूम आया और अफसरों को भनक तक नहीं लगी

श्रीगंगानगर: राजस्थान की खुली जेलों (ओपन जेल) में सुधार के लिए रखे जाने वाले सजायाफ्ता कैदी किस कदर सिस्टम से खिलवाड़ कर रहे हैं, इसका एक बेहद चौंकाने वाला मामला श्रीगंगानगर से सामने आया है। जयपुर के बहुचर्चित दुष्यंत हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी दीक्षांत कामरा खुली जेल से न सिर्फ 5 दिन के लिए थाईलैंड घूम आया, बल्कि वहां से लौटने के बाद लग्जरी कार में अफीम की तस्करी भी करता रहा। इस दौरान जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी और रजिस्टर में उसकी फर्जी हाजिरी लगती रही।

दीक्षांत कामरा, कैदी

5 दिन थाईलैंड में काटी मौज, जेल में लगती रही हाजिरी

जानकारी के अनुसार, नरसिंहपुरा बारानी खुली जेल में आजीवन कारावास भुगत रहा दीक्षांत कामरा 9 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2025 तक, पूरे पांच दिन थाईलैंड घूमकर आया। इस दौरान जेल में प्रहरी पाबुराम से सांठगांठ कर उसकी फर्जी हाजिरी लगाई जाती रही। दीक्षांत जिस पासपोर्ट पर विदेश गया, वह वर्ष 2016 में उसके पदमपुर (श्रीगंगानगर) स्थित स्थायी पते से जारी हुआ था। खुली जेल में दोनों समय (सुबह-शाम) हाजिरी का नियम होने के बावजूद 5 दिन तक कैदी के गायब रहने और अफसरों को भनक न लगने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अफीम तस्करी में पकड़ा गया तब खुला राज

इस बड़े खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 3 नवम्बर 2026 को जवाहरनगर थाना पुलिस ने दीक्षांत कामरा को एक लग्जरी कार (एलेंट्रा) के साथ 40 ग्राम अफीम की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया। जवाहरनगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद जब जांच की गई, तो उसके विदेश जाने और खुली जेल से तस्करी का नेटवर्क चलाने के हैरान करने वाले खुलासे हुए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक शर्मा के अनुसार, आरोपी को 4 नवंबर 2026 को वापस केंद्रीय कारागृह (सेंट्रल जेल) भेज दिया गया है।

जनवरी 2026 में हवालात में रहा, जेल प्रशासन ने दबाया मामला

पुलिस पूछताछ में दीक्षांत कामरा के एक और कारनामे का खुलासा हुआ है। जनवरी 2026 में खुली जेल में शाम की हाजिरी लगाने के बाद वह पदमपुर स्थित अपने घर जा रहा था। रास्ते में घमूड़वाली पुलिस ने उसे शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उसे रातभर हवालात में रखा गया और अगली सुबह मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जमानत पर छोड़ दिया गया।

इस दौरान दीक्षांत ने पुलिस से यह तथ्य छिपा लिया कि वह उम्रकैद का कैदी है। वहीं, नरसिंहपुरा खुला बंदी शिविर के प्रभारी ने भी कैदी के रात भर गायब रहने की इस जानकारी को उच्च अधिकारियों से छिपा लिया।

2018 का बहुचर्चित दुष्यंत हत्याकांड

दीक्षांत कामरा वही अपराधी है जिसने ‘लेडी डॉन’ प्रिया सेठ के साथ मिलकर मई 2018 में जयपुर के झोटवाड़ा निवासी दुष्यंत शर्मा को हनीट्रैप में फंसाकर अगवा किया था। परिजनों से तीन लाख रुपए फिरौती वसूलने के बाद भी दोनों ने दुष्यंत का गला घोंटकर हत्या कर दी थी। पहचान छिपाने के लिए चाकू से उसका चेहरा बिगाड़ दिया गया और शव को एक सूटकेस (अटैची) में भरकर आमेर इलाके में फेंक दिया था। साल 2023 में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

जेल ट्रांसफर का खेल और उठते सवाल सजा सुनाए जाने के बाद से दीक्षांत लगातार अपनी सुविधानुसार जेलें बदलता रहा:

  • 3 मई 2025: पहली बार नरसिंहपुरा बारानी (श्रीगंगानगर) खुली जेल में आया।
  • 13 फरवरी 2026: श्रीगंगानगर सेंट्रल जेल में दाखिल।
  • 25 मार्च 2026: बीछवाल (बीकानेर) खुली जेल भेजा गया, जहां वह 2 अक्टूबर 2026 तक रहा।
  • 3 अक्टूबर 2026: वापस कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर खुली जेल में शिफ्ट हो गया।

जेल में चल रही इन अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में शिकायत करने वाले बर्खास्त पुलिस सिपाही अनिल गोदारा का आरोप है कि इस पूरे खेल में जेल के बड़े अधिकारी और कर्मचारी मिले हुए हैं, जिनकी गहनता से जांच होनी चाहिए। वहीं, कानून के जानकार और एडवोकेट चंद्रमणि मौर्य ने इसे मृतक दुष्यंत के परिवार के मानवाधिकारों का सीधा हनन बताया है। वर्तमान में श्रीगंगानगर जिले में तीन खुली जेलें संचालित हैं, जिनमें करीब 55 सजायाफ्ता बंदी रह रहे हैं।


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