जयपुर: राजस्थान में देवी-देवताओं की संपत्तियों पर भूमाफिया और अतिक्रमी कुंडली मारकर बैठे हैं। प्रदेश के रियासतकालीन 253 सरकारी मंदिरों की अरबों रुपये की बेशकीमती जमीन पर 1,775 से ज्यादा अतिक्रमियों ने कब्जा जमा रखा है। इसका सीधा अर्थ है कि औसतन हर मंदिर की जमीन पर 7 अतिक्रमी काबिज हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को हाल ही में सौंपी गई एक विस्तृत रिपोर्ट में इस बड़े जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसके बाद अब राज्य सरकार इन कब्जों को नेस्तनाबूद करने की पुख्ता तैयारी कर रही है।
नए सिरे से होगा जमीनी सर्वे, 3 महीने में चलेगा बुलडोजर
रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने सभी सरकारी और मंदिर माफी की जमीनों का नए सिरे से जमीनी सर्वे कराने का फैसला किया है। इसके लिए मंदिरों और अतिक्रमियों की एक विस्तृत सूची फिर से तैयार की जा रही है, जिसे आगामी तीन महीनों के भीतर लागू कर दिया जाएगा। इस सख्त प्रक्रिया के तुरंत बाद प्रदेशभर में एक वृहद अभियान चलाकर मंदिरों की जमीनों पर ‘पीला पंजा’ (बुलडोजर) चलाया जाएगा और अरबों की संपत्ति को मुक्त कराया जाएगा।
किशनगढ़ और टोंक में सबसे भयंकर अतिक्रमण, 98% जमीन पर कब्जा
विधानसभा में पेश किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में सबसे ज्यादा अतिक्रमण अजमेर और टोंक जिलों में है। राज्य में दर्ज कुल अतिक्रमित मंदिर भूमि का लगभग 46.6 प्रतिशत हिस्सा केवल इन्हीं दो जिलों में है। अजमेर के किशनगढ़ स्थित मदनमोहनजी मंदिर का हाल सबसे बुरा है। इस मंदिर की कुल 1,094 हेक्टेयर जमीन में से 1,070.10 हेक्टेयर (लगभग 97.8 प्रतिशत) पर अवैध कब्जा है। मंदिर के अपने उपयोग के लिए सिर्फ 24 हेक्टेयर जमीन ही बची है। इसी तरह टोंक जिले के टोडारायसिंह स्थित भूतेश्वरजी मंदिर की 619.13 हेक्टेयर जमीन भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है। सिर्फ इन दो मंदिरों की ही करीब 1,689 हेक्टेयर (4,174 एकड़) जमीन पर अतिक्रमणकारियों का राज है।
संपत्तियों पर लगेंगे बोर्ड और प्रमुख मंदिरों में तीसरी आंख का पहरा
देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि देवस्थान विभाग कृषि भूमि पर काबिज अतिक्रमियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मंदिरों की जमीनों का संरक्षण भी करेगा। जिन मंदिरों की संपत्तियों पर कोई पहचान नहीं है, वहां विभाग के बोर्ड लगाए जाएंगे। अतिक्रमण से मुक्त होने के बाद संपत्तियों को विधिवत चिह्नित किया जाएगा और प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा व निगरानी के लिए वहां हाईटेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे भी लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में कोई दोबारा कब्जा न कर सके।