बुजुर्ग को फेसबुक पर विदेशी हसीना बनकर 22 लाख की लगाई चपत, बेटे को विदेश में नौकरी लगाने का दिया झांसा

फर्जी कस्टम रसीदों और मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट से बुजुर्ग को जाल में फंसाया; गुरुग्राम से आरोपी गिरफ्तार, तीन बैंक खातों में आए थे 4.12 लाख रुपये

जयपुर । फेसबुक पर विदेशी महिला बनकर दोस्ती की, बेटे को विदेश में नौकरी दिलाने और खुद भारत आने का सपना दिखाया। फिर कभी एयरपोर्ट कस्टम शुल्क, कभी मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट तो कभी विदेशी मुद्रा ट्रांसफर करने के नाम पर रुपये ऐंठे। इतना ही नहीं, फर्जी पासपोर्ट, हवाई टिकट और विदेशी बैंक की रसीदें भेजकर पीड़ित का भरोसा भी जीत लिया। इस तरह जयपुर निवासी से 22 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का राजस्थान पुलिस के सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (R4C) ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। अब पुलिस ठगी की रकम की मनी ट्रेल खंगालने के साथ गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।


विदेशी महिला बनकर बुना ठगी का जाल

पुलिस के अनुसार, जयपुर निवासी परिवादी की 3 मई 2024 को फेसबुक पर दिओंन मार्ले नाम की महिला से बातचीत शुरू हुई। कथित महिला ने खुद को अमेरिका का निवासी और इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में अकाउंटेंट बताया। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाई और परिवादी के बेटे को विदेश में नौकरी दिलाने के साथ खुद भारत आने का भरोसा दिलाया।

इसके बाद ठगी का असली खेल शुरू हुआ। कभी एयरपोर्ट पर कस्टम शुल्क जमा कराने, कभी मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट बनवाने, तो कभी आयकर और लाउंजिंग चार्ज के नाम पर रुपये मांगे गए। विदेशी मुद्रा को भारतीय बैंक खाते में ट्रांसफर करने का झांसा देकर भी रकम वसूली गई। विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर फर्जी पासपोर्ट, एयर टिकट, विदेशी बैंक की रसीद, मास्टर कार्ड और कस्टम व आयकर विभाग से संबंधित कूटरचित दस्तावेज भेजे।

कभी कस्टम अधिकारी, कभी दूसरे विभाग का अफसर बनकर फोन

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग पहचान बनाकर परिवादी से संपर्क करते थे। कभी खुद को कस्टम अधिकारी तो कभी अन्य सरकारी विभागों का कर्मचारी बताकर फोन किया जाता था। हर बार कोई नया शुल्क बताकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती रही। इस तरह पीड़ित से कुल 22 लाख रुपये ठग लिए गए।
जब परिवादी ने आगे रुपये देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसके घर का पता होने की बात कहकर जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह सोशल मीडिया के जरिए खास तौर पर बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों को निशाना बनाता था।

तीन बैंक खातों में आए 4.12 लाख रुपये

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी की पहचान वसीम हुसैन निवासी बरेली, उत्तर प्रदेश के रूप में की है। जांच में पता चला कि आरोपी ने अपने तीन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में पहुंचाने के लिए किया। इन खातों में परिवादी से ठगी गई करीब 4.12 लाख रुपये की राशि आई थी। इसके बाद रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई या एटीएम से निकाली गई।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने अपने चचेरे भाइयों मुर्सद हुसैन और अर्सद हुसैन के कहने पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए थे। आरोप है कि उसने बैंक खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल सिम उन्हें सौंप दिए। इसके बदले उसे 70 हजार रुपये कमीशन देने का लालच दिया गया था। पुलिस अब इन खातों के जरिए हुए लेन-देन और अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।


तकनीकी जांच से गुरुग्राम तक पहुंची पुलिस

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह के अनुसार, पुलिस टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। मोबाइल फोन और बैंक खातों से जुड़े विवरणों के आधार पर आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। इसके बाद गुरुग्राम में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया गया।
उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन और सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी एवं पुलिस उप अधीक्षक गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। पुलिस अब व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, कॉल डिटेल, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन की मनी ट्रेल खंगाल रही है, ताकि ठगी की पूरी रकम के रास्ते और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।


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