जयपुर: राजस्थान में गैंगस्टर रोहित गोदारा के नेटवर्क की जड़ें अब केवल हथियारों की सप्लाई और रंगदारी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि इसकी तारें विदेश और पाकिस्तान तक जुड़ी पाई जा रही हैं। सीकर में गिरफ्तार किए गए सेना के जवान भोपाल सिंह राजावत से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियां ऐसे संदिग्ध संपर्कों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, जिनकी कड़ियां पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों तक पहुंचती हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राजावत का संपर्क पंजाब के वांटेड जीशान से सामने आया है और जीशान का संबंध पाकिस्तान के शहजाद भट्टी नेटवर्क से बताया जा रहा है।

सेना की वर्दी और वाहन के इस्तेमाल की आशंका
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, आरोपी जवान भोपाल सिंह राजावत पर गोदारा गैंग के लिए अवैध हथियार पहुंचाने का गंभीर आरोप है। हथियारों की इस डिलीवरी के दौरान सुरक्षा से जुड़े संदेहों को टालने के लिए सेना के वाहनों और वर्दी का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे दोबारा रिमांड पर लिया गया है, जहां उसके मोबाइल फोन और डिजिटल संपर्कों की तकनीकी जांच की जा रही है। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
मोबाइल डेटा और विदेश में बैठे हैंडलर
इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी आरोपी जवान का मोबाइल फोन बना हुआ है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जवान किन-किन संदिग्ध नंबरों और सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिए संपर्क में था। शुरुआती सुरागों से पता चला है कि विदेश में बैठे गैंगस्टरों और स्थानीय अपराधियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले चेहरों की पहचान करने के लिए एजेंसियां लगातार डेटा खंगाल रही हैं।
पाकिस्तान कनेक्शन और शहजाद भट्टी नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के हालिया आंकड़े इस पार्सपरिक खतरे को और गंभीर बनाते हैं। केंद्र सरकार के 17 अगस्त 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान-आधारित और आईएसआई (ISI) समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देश के 14 राज्यों में बड़ी कार्रवाई की गई थी। इस दौरान 253 लोगों को हिरासत में लिया गया, 80 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। इनमें अकेले राजस्थान से 15 लोगों की हिरासत शामिल है। इस नेटवर्क के पास से आईईडी (IED), पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्टल और जासूसी में प्रयुक्त होने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए थे।

राजस्थान में जासूसी और ड्रग्स के बढ़ते मामले
- जैसलमेर और श्रीगंगानगर जासूसी केस: साल 2025 में जैसलमेर और श्रीगंगानगर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को सामरिक और सैन्य सूचनाएं भेजने के आरोप में कई गिरफ्तारियां हुईं।
- सैन्य ठिकानों पर नजर: अप्रैल 2026 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई में राजस्थान के बीकानेर और अलवर में सैन्य गतिविधियों की निगरानी के लिए गुप्त रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का मामला सामने आया, जिनकी लाइव फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलरों तक पहुंचाई जा रही थी।
- ड्रग्स और हवाला का गठजोड़: सितंबर 2026 में चूरू निवासी कुलदीप स्वामी की गिरफ्तारी के दौरान भारी मात्रा में हेरोइन और हवाला के जरिए रंगदारी के पैसे पहुंचाने के साक्ष्य सामने आए, जिससे यह साफ होता है कि ड्रग्स, हवाला और हथियार तस्करी के नेटवर्क आपस में जुड़े हुए हैं।
निष्कर्ष: क्या अपराध और जासूसी के रास्ते एक हो रहे हैं?
फिलहाल सेना के जवान से जुड़े मामले और पाकिस्तान-लिंक्ड जासूसी मामलों को एक ही गिरोह का हिस्सा साबित करने के लिए ठोस सार्वजनिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली में बड़ी समानताएं हैं। सोशल मीडिया के जरिए भर्ती, हवाला के माध्यम से फंडिंग, हथियारों व ड्रग्स की तस्करी और संवेदनशील ठिकानों की रेकी इस बात का संकेत देती है कि जांच एजेंसियों के सामने अब इन गठजोड़ की तह तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।