Expose Now एक्सक्लूसिव: सरकारी अस्पतालों में ‘जिंदगी’ से खिलवाड़, 5.77 करोड़ के घटिया मल्टीपैरा मॉनिटर खरीद घोटाले का भंडाफोड़, तकनीकी जांच में खुली सप्लाई की पोल

-750 सब-स्टैंडर्ड मॉनिटर्स से वेंटिलेटर-आईसीयू में मरीजों की सांसों पर खतरा, टेंडर स्पेसिफिकेशन को दरकिनार कर थमाए गए ‘देसी जुगाड़’ उपकरण

-सप्लायर फर्म क्लेरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज, करोड़ों की रिकवरी और सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने की कार्रवाई शुरू

-Expose Now इन्वेस्टिगेशन: जयपुर, दौसा, बीकानेर और अजमेर के अस्पतालों में खोली गई मशीनों की परतें, अलग मॉड्यूल के बजाय मेन बोर्ड पर मिला डायरेक्ट कनेक्शन

जयपुर। सरकारी अस्पतालों के आईसीयू, इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए खरीदे गए जीवनरक्षक उपकरणों में बड़े फर्जीवाड़े और कमीशनखोरी का खुलासा हुआ है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के जरिए प्रदेशभर के अस्पतालों में सप्लाई किए गए 750 मल्टीपैरा मॉनिटर्स तकनीकी मानकों (Technical Specifications) पर पूरी तरह फेल पाए गए हैं। करीब 5,77,80,240 रुपये के इस पूरे टेंडर में सीधे तौर पर मरीजों की जान जोखिम में डाली गई। जांच में खेल उजागर होने के बाद अब सप्लायर कंपनी मेसर्स क्लेरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड (मोहाली) के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है और भुगतान की गई राशि की रिकवरी के साथ-साथ सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शिकायत के बाद जांच में खुली पोल, लगाया गया लोकल बोर्ड:-

अस्पतालों में लगाए गए इन मॉनिटर्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद जब तकनीकी जांच कमेटियों ने मौके पर जाकर उपकरणों को खोलकर देखा, तो गंभीर खामियां सामने आईं:

-अलग SPO2 मॉड्यूल नदारद: बीकानेर के पीबीएम व टीबी अस्पताल, दौसा जिला अस्पताल और जयपुर के जे.के. लोन व जनाना अस्पताल में जब उपकरणों की इंटरनल चेकिंग की गई, तो पाया गया कि SPO2 कनेक्टर सीधे मेन बोर्ड से जुड़ा हुआ था। तय मानकों के तहत लगने वाला अलग से डेडिकेटेड SPO2 मॉड्यूल उपकरणों के भीतर मिला ही नहीं।

-ब्रैंडेड तकनीक के नाम पर धोखा: कई अस्पतालों के मॉनिटर्स पर जिस उच्च मानक (Nellcor) तकनीक की मार्किंग और लेबलिंग होनी चाहिए थी, वह उपकरणों के आंतरिक या बाहरी हिस्सों से पूरी तरह गायब पाई गई।

-‘Spectra Smart+’ मॉडल में देसी सर्किट: जांच अधिकारियों द्वारा खोले गए लगभग सभी ‘Spectra Smart+’ मॉडलों के मुख्य सर्किट बोर्ड (मदर बोर्ड) पर केवल ‘Clarity, Made in India’ अंकित था, जो टेंडर के उच्च स्तरीय तकनीकी मापदंडों का खुला उल्लंघन साबित हुआ।

अस्पताल-दर-अस्पताल जांच में सामने आई हकीकत:-

Expose Now के पास मौजूद आधिकारिक जांच दस्तावेजों के अनुसार, प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में सप्लाई किए गए मॉनिटर्स की जांच में चौंकाने वाले तथ्य दर्ज किए गए हैं:

-पीबीएम अस्पताल, बीकानेर: टीबी अस्पताल बीकानेर में सप्लाई मॉनिटर (सीरियल नंबर SSPR-EETS-1062LT) की जांच में ओरिजिनल SPO2 प्रोब मौके पर मिला ही नहीं। उपकरण के भीतर कोई अलग SPO2 मॉड्यूल नहीं था और सीधे मेन बोर्ड पर कनेक्शन किया गया था।

-जिला चिकित्सालय दौसा: दौसा में सप्लाई किए गए 15 मॉनिटर्स को कमेटियों के सामने खोला गया। सभी उपकरणों में SPO2 का कनेक्शन सीधे मेन बोर्ड पर मिला।

-जे.के. लोन एवं जनाना अस्पताल जयपुर: बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल जे.के. लोन में जांचे गए 19 मॉनिटर्स और जनाना अस्पताल के 8 मॉनिटर्स के इंटरनल पार्ट्स भी तय मानकों के विपरीत पाए गए।

-जेएलएन अस्पताल अजमेर: अजमेर के टीबी आईसीयू, ईएनटी ओटी और यूरोलॉजी ओटी में लगे 10 मॉनिटर्स की पड़ताल में भी मदर बोर्ड पर यही सब-स्टैंडर्ड सेटअप दर्ज किया गया।

Expose Now का सीधा सवाल: बिना जांच के कैसे पास हुआ 5.77 करोड़ का कंसाइनमेंट:-

इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य महकमे के क्वालिटी कंट्रोल और खरीद व्यवस्था की कलई खोल दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

-जब उपकरण टेंडर के तकनीकी स्पेसिफिकेशन के अनुरूप थे ही नहीं, तो सेंट्रल स्टोर और तकनीकी जांच टीमों ने इनकी डिलीवरी को हरी झंडी कैसे दी?

-आईसीयू और इमरजेंसी जैसे अति-संवेदनशील वार्डों में लगने वाले उपकरणों की इन-हाउस टेस्टिंग किए बिना इन्हें सीधे मरीजों पर इस्तेमाल के लिए कैसे भेज दिया गया?

विभाग ने फर्म पर FIR दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री करने की कोशिश तो की है, लेकिन सवाल उन जिम्मेदारों पर भी है जिनके हस्ताक्षरों से करोड़ों रुपये की यह सब-स्टैंडर्ड सप्लाई अस्पतालों तक पहुंची और महीनों तक मरीजों की धड़कनों से खिलवाड़ होता रहा। Expose Now इस मामले की तह तक जाकर उन तमाम चेहरों को बेनकाब करता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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