Kishau Project: सीकर, चूरू और झुंझुनूं का जल संकट होगा दूर, किशाऊ बांध समझौते से जगी नई उम्मीदें

राजस्थान: देश में लंबे समय से अटकी और ठंडे बस्ते में पड़ी जल परियोजनाओं को गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली में ‘किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना’ (Kishau Multipurpose Project) के समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते में राजस्थान सहित छह राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा) के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया और करार पर मुहर लगाई। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से शेखावाटी समेत राजस्थान के कई जिलों को बड़ा लाभ मिलेगा।

राजस्थान को मिलेगा 124 एमसीएम पानी, शेखावाटी की बल्ले-बल्ले

इस बहुउद्देशीय समझौते के तहत राजस्थान को यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध से 124 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी मिलेगा। यह पानी ताजेवाला हेड से चूरू के हासियावास तक प्रस्तावित तीन वृहद पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए राजस्थान की सीमा में पहुंचेगा। इस सौगात से प्रदेश के सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के तमाम क्षेत्रों में पेयजल संकट हमेशा के लिए दूर होगा तथा सिंचाई व अन्य आवश्यकताओं के लिए सुगम जल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

कैसे सुलझा दशकों पुराना गतिरोध?

यह महत्वाकांक्षी परियोजना लंबे समय से हिमाचल प्रदेश के बिजली घटक की लागत वहन करने को लेकर बने वित्तीय विवाद के कारण अटकी हुई थी। हालिया और संशोधित समझौते के तहत, हिमाचल प्रदेश अपने हिस्से का 95 प्रतिशत पानी दिल्ली और राजस्थान को दे रहा है, जिसके बदले दिल्ली और राजस्थान उस राज्य के विद्युत घटक की वित्तीय लागत का वहन करेंगे। इस 95 प्रतिशत पानी में से 75 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली को और 25 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान को आवंटित किया गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश 5 प्रतिशत पानी अपने पास रखेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार इस राष्ट्रीय परियोजना के जल घटक का लगभग 90 प्रतिशत खर्च खुद वहन करेगी।

क्या है किशाऊ परियोजना और इसके अन्य लाभ?

  • भौगोलिक स्थिति: यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की सीमा पर टौंस नदी (यमुना की सहायक नदी) पर प्रस्तावित है।
  • विशाल बांध व लागत: लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत एक विशाल कंक्रीट ग्रेविटी बांध (ऊंचाई लगभग 232.6 मीटर) बनाया जाएगा।
  • बिजली उत्पादन: इस परियोजना से करीब 422 से 660 मेगावाट तक स्वच्छ जलविद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा।
  • सिंचाई व पेयजल: इससे करीब 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी और अपर यमुना बेसिन के राज्यों को पेयजल सुरक्षा मिलेगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताई खुशी

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस ऐतिहासिक समझौते को राज्यों के आपसी सहयोग और ‘टीम इंडिया’ की भावना की एक बेहतरीन मिसाल बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन के अनुरूप दशकों से लंबित योजनाओं का समाधान निकल रहा है। राजस्थान को पूर्व में यमुना जल समझौता, नर्मदा जल समझौता और अब किशाऊ बांध परियोजना के रूप में एक के बाद एक बड़ी सौगातें मिली हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेंगी।

इस हस्ताक्षर समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।


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