करौली। करौली जिले के सभी 6 नगर निकायों के 210 वार्डों की मतगणना के परिणाम घोषित हो गए हैं। इन चुनावों में स्थानीय असंतोष और UGC विरोध का सीधा असर चुनावी नतीजों पर देखने को मिला। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों—कांग्रेस और भाजपा—को पछाड़ते हुए निर्दलीय प्रत्याशियों ने 90 वार्डों में जीत दर्ज कर अपना परचम लहराया है। अधिकांश निकायों में बोर्ड गठन के लिए अब निर्दलीय प्रत्याशी निर्णायक (किंगमेकर) भूमिका में आ गए हैं।
दलीय स्थिति की बात करें तो कांग्रेस ने करौली, टोडाभीम और मंडरायल में बढ़त बनाई, जबकि भाजपा केवल सपोटरा में ही एकतरफा जीत हासिल कर सकी। हिण्डौन और सुरौठ में प्रमुख राजनीतिक दल पूरी तरह हाशिए पर नजर आए।
निकायवार चुनाव परिणाम: एक नजर में
| नगर निकाय | कुल वार्ड | कांग्रेस | भाजपा | निर्दलीय | अन्य |
| करौली नगर परिषद | 55 | 28 | 11 | 15 | 01 (बसपा) |
| हिण्डौन नगर परिषद | 60 | 09 | 12 | 39 | 00 |
| टोडाभीम नगरपालिका | 35 | 14 | 06 | 15 | 00 |
| सुरौठ नगरपालिका | 20 | 02 | 02 | 16 | 00 |
| मंडरायल नगरपालिका | 20 | 10 | 08 | 02 | 00 |
| सपोटरा नगरपालिका | 20 | 03 | 15 | 02 | 00 |
| कुल योग | 210 | 66 | 54 | 89 | 01 |
कहां किसने मारी बाजी?
- करौली नगर परिषद: कुल 55 वार्डों में कांग्रेस ने स्पष्ट बढ़त हासिल करते हुए 28 सीटों पर विजय प्राप्त की। वहीं भाजपा 11 सीटों पर सिमट गई। 15 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जबकि 1 सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खाते में गई।
- हिण्डौन नगर परिषद: 60 वार्डों वाली हिण्डौन नगर परिषद में निर्दलीयों ने दोनों दलों का गणित बिगाड़ दिया। यहां रिकॉर्ड 39 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी जीते। भाजपा को 12 और कांग्रेस को मात्र 9 सीटों से संतोष करना पड़ा।
- टोडाभीम नगरपालिका: यहां 35 वार्डों में कड़ा मुकाबला रहा, जहां 15 वार्डों में निर्दलीय और 14 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भाजपा यहां मात्र 6 सीटों पर सिमट गई।
- सुरौठ नगरपालिका: 20 वार्डों में से 16 पर निर्दलीयों ने एकतरफा कब्जा किया। कांग्रेस और भाजपा दोनों दल केवल 2-2 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सके।
- मंडरायल नगरपालिका: 20 वार्डों में कांग्रेस ने 10 और भाजपा ने 8 सीटें हासिल कीं, जबकि 2 निर्दलीय चुनाव जीते।
- सपोटरा नगरपालिका: भाजपा के लिए एकमात्र राहत सपोटरा से आई, जहां पार्टी ने 20 में से 15 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यहां कांग्रेस को 3 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं।
UGC विरोध और स्थानीय मुद्दों का दिखा असर
चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, जिले में UGC से जुड़े मुद्दों को लेकर उपजा जनआक्रोश और स्थानीय स्तर पर टिकट वितरण से उपजी नाराजगी का सीधा फायदा निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला। हिण्डौन और सुरौठ जैसे बड़े क्षेत्रों में मतदाताओं ने दोनों स्थापित दलों को दरकिनार करते हुए निर्दलीयों पर भरोसा जताया। अब निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों पर काबिज होने के लिए निर्दलीयों का रुख ही अंतिम फैसला तय करेगा।
मतगणना स्थल पर प्रशासनिक बदइंतजामी के आरोप
एक तरफ जहां चुनावी नतीजों की हलचल रही, वहीं दूसरी तरफ करौली स्थित मतगणना स्थल पर जिला प्रशासन की लचर व्यवस्थाओं को लेकर तीखी नाराजगी देखने को मिली। मतगणना स्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों, चुनावी एजेंटों और कार्मिकों के लिए भोजन और अल्पाहार की समुचित व्यवस्था नहीं होने के गंभीर आरोप लगे।
दिनभर चली मतगणना प्रक्रिया के दौरान एजेंट और सुरक्षाकर्मी पानी और खाने के लिए परेशान होते रहे। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की इस अनदेखी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे घोर लापरवाही करार दिया।