भरतपुर। बिहार के खगड़िया जिले में एसपी के पद पर तैनात भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब राजस्थान के भरतपुर तक पहुंच गया है। देर रात पत्नी अपने ससुराल और रिश्तेदारों के घर पहुंचीं, जहां दरवाजा नहीं खोले जाने का आरोप लगाते हुए वह सीधे मथुरा गेट थाने पहुंच गईं। यह विवाद अब पुलिस, समाज और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

ससुराल और ननद के घर नहीं मिला प्रवेश
पूजा के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि उनके पति भानु प्रताप सिंह अपनी छह साल की बेटी को लेकर भरतपुर आए हैं। सूचना मिलते ही वह भी भरतपुर पहुंचीं और सबसे पहले गीता कॉलोनी स्थित ससुराल गईं। आरोप है कि काफी देर इंतजार और आवाज देने के बाद भी परिवार के सदस्यों ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद वह विजय नगर स्थित अपनी ननद के घर पहुंचीं, लेकिन वहां भी उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। ससुराल पक्ष से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर वह देर रात मथुरा गेट थाने पहुंचीं और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

पुलिस ने बताया पारिवारिक मामला
थाने पहुंचीं पूजा देर रात तक वहीं मौजूद रहीं और पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला पति-पत्नी के आपसी पारिवारिक विवाद और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। इसमें तत्काल कोई संज्ञेय आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों की स्थिति और कानूनी पहलुओं को देखा जा रहा है।
मासूम बच्ची को लेकर बढ़ी तल्खी
इस विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु दंपती की नाबालिग बेटी है। पूजा का दावा है कि उनके पति बेटी को अपने साथ भरतपुर लेकर आए थे, लेकिन जब वह यहां पहुंचीं तो पति वहां से चले गए। दोनों पक्षों के बीच बच्ची की कस्टडी का मामला पहले से ही अदालत की प्रक्रिया के अधीन बताया जा रहा है। बाल अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के तहत बच्ची की पहचान से जुड़ी निजी जानकारियां गोपनीय रखी गई हैं।
2016 में हुआ था प्रेम विवाह, तैयारी के दिनों में शिक्षिका थीं पूजा
पूजा ने पुलिस और मीडिया को दिए बयानों में बताया कि उनकी और भानु प्रताप सिंह की मुलाकात वर्ष 2015 में एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। परिवार की असहमति के बावजूद दोनों ने 16 जनवरी 2016 को प्रेम विवाह किया। शादी के शुरुआती दौर में पूजा ने भरतपुर के एक निजी स्कूल में करीब पांच वर्षों तक शिक्षिका के रूप में कार्य किया, जबकि भानु प्रताप सिंह यूपीएससी की तैयारी में जुटे रहे। सिविल सेवा में चयन और पुलिस सेवा मिलने के शुरुआती वर्षों तक सब ठीक रहा, लेकिन बाद में दोनों के बीच वैचारिक मतभेद और दूरियां बढ़ती चली गईं।

सोशल मीडिया पर ऑडियो हुआ वायरल
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो भी सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यह बातचीत आईपीएस भानु प्रताप सिंह और धनवंत सिंह राठौड़ के बीच की है। कथित ऑडियो में आईपीएस अधिकारी यह कहते सुनाई देते हैं कि पूरा मामला अदालत में विचाराधीन है और इसका अंतिम निर्णय कानून के मुताबिक ही होगा। साथ ही वह बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने और स्वास्थ्य ठीक न होने का भी हवाला देते हैं।
न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें फिलहाल यह विवाद व्यक्तिगत आरोपों और पारिवारिक तनाव के इर्द-गिर्द घूम रहा है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी आधिकारिक और कानूनी पुष्टि न्यायालय के फैसलों और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।