राजस्थान में सरकारी शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक का फायदा उठाकर एक ग्रेड थर्ड शिक्षक द्वारा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपी शिक्षक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी साधनों का उपयोग करके हूबहू फर्जी डेपुटेशन लेटर तैयार करता था और इसके एवज में प्रत्येक टीचर से 50 हजार रुपए वसूलता था। इस मामले में अब तक 5 शिक्षकों द्वारा फर्जी आदेशों के आधार पर ज्वाइनिंग करने का खुलासा हुआ है।
कैसे चलता था फर्जीवाड़े का पूरा खेल?
- मास्टरमाइंड शिक्षक: जोधपुर के भोपालगढ़ के रहने वाले और फलोदी के चाखू गांव में तैनात ग्रेड थर्ड लेवल-2 के शिक्षक सौरव शर्मा ने इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया।
- एआई (AI) और फर्जी हस्ताक्षर: आरोपी सौरव ने प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग (बीकानेर) के तत्कालीन निदेशक सीताराम जाट के रिटायरमेंट (31 जुलाई 2026) के समय उनके फर्जी डिजिटल/हस्तलिखित हस्ताक्षर का उपयोग कर ऐसे आदेश बनाए, जिन पर शक करना मुश्किल था।
- 50 हजार रुपए प्रति ट्रांसफर: आरोपी शिक्षकों को मंत्रियों और उच्चाधिकारियों (जैसे बीकानेर निदेशालय के नाम पर फर्जी फोन कॉल) से अपनी पहचान का झांसा देता था और मनचाही जगह पोस्टिंग या डेपुटेशन दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपए वसूलता था।

किन-किन शिक्षकों के नाम आए सामने?
- सुमन देवी: अजमेर के स्कूल से हनुमानगढ़ के भादरा स्थित स्कूल में फर्जी आदेश से ट्रांसफर करवाया, जिन्हें बाद में सस्पेंड कर दिया गया।
- नंदलाल मील: हनुमानगढ़ के भादरा के रहने वाले दिव्यांग शिक्षक, जो घर से 450 किमी दूर कार्यरत थे, उन्हें भी फर्जी आदेश से राहत दिलाई गई।
- कमलेश चौधरी: तिंवरी से रतकुड़िया स्कूल में ज्वाइनिंग कराई गई।
- सीमा: बिलाड़ा से रतकुड़िया स्कूल में फर्जी डेपुटेशन पर लाई गईं।
- श्यामलाल ताड़ा: नाहरपुरा सरकारी स्कूल के शिक्षक, जिनका निकाय चुनाव के नाम पर फर्जी डेपुटेशन लेटर बनाया गया था।
निकाय चुनाव के डेपुटेशन ने खोली पोल

पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब निकाय चुनाव के दौरान डेपुटेशन के इन आदेशों की सत्यता पर स्थानीय प्रिंसिपलों को शक हुआ। जब शिक्षा विभाग स्तर पर इनकी जांच करवाई गई, तो बीकानेर निदेशालय से ऐसे किसी भी आदेश के जारी होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद अजमेर व अन्य जिलों में शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षकों को निलंबित कर दिया और पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई।