राजस्थान में जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। शहर के 150 से अधिक वार्डों में टिकट पाने की होड़ और आंतरिक बगावत की आशंका के चलते भाजपा संगठन के सामने कड़ी चुनौती खड़ी थी। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और जयपुर के वरिष्ठ प्रभारियों की मौजूदगी में देर रात तक बैठकों का दौर चला। लंबी मंत्रणा और राजनीतिक समीकरणों को साधने के बाद नामांकन के अंतिम समय में उम्मीदवारों को पार्टी के अधिकृत सिंबल और सूची सौंपी गई।
इस सूची में पार्टी ने पुराने समर्पित नेताओं, महिला मोर्चा की पदाधिकारियों के साथ-साथ हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व पार्षदों पर भी दांव लगाया है।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को मिला पार्षद का टिकट
जयपुर की पूर्व महापौर (मेयर) और पूर्व कांग्रेस सांसद प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल के राजनीतिक सफर में एक बेहद दिलचस्प मोड़ आया है। कांग्रेस में रहते हुए एक समय जयपुर की पहली महिला महापौर बनने वाली और लोकसभा चुनाव लड़ने वाली ज्योति खंडेलवाल को अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में केवल एक वार्ड पार्षद का टिकट दिया है। उल्लेखनीय है कि ज्योति खंडेलवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। कभी पूरे शहर की कमान संभालने वाली नेता को अब वार्ड स्तर पर उतारने के भाजपा के इस फैसले ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने उन्हें जमीनी स्तर से संगठन में अपनी पैठ साबित करने की चुनौती दी है।
प्रमुख वार्डों में किसे मिला मौका?
- वार्ड 107: भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अनुराधा माहेश्वरी को चुनावी मैदान में उतारा गया है।
- वार्ड 121: नीरज अग्रवाल को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है; वे पहले भी पार्षद रह चुके हैं और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
- वार्ड 99: भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री रणजीत सोडाला की पत्नी सरोज कंवर को टिकट मिला है।
नामांकन के आखिरी दिन तक रही खींचतान
जयपुर नगर निगम के वार्डों में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा के भीतर जबरदस्त खींचतान देखने को मिली। कई वार्डों में एक ही सीट पर 10 से 15 मजबूत दावेदार अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। पार्टी नेतृत्व का मुख्य ध्यान इस बात पर था कि टिकट कटने की स्थिति में कोई भी दावेदार बगावत न करे। इसी रणनीति के तहत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय सीधे चयनित उम्मीदवारों को फॉर्म-बी और सिंबल सौंपे गए।