EXPOSE NOW EXCLUSIVE : कृषि विश्वविद्यालयों में खुला ‘नियुक्ति घोटाला’, राजभवन के नियमों को कूड़ेदान में डाल कुलपतियों ने बांटी रेवड़ियां, सीनियर प्रोफेसर दरकिनार—चहेतों को नवाजा डीन और डायरेक्टर की कुर्सी से!

-इंटरव्यू के नाम पर बड़ा ‘खेल’, मेरिट लिस्ट में 6ठे नंबर पर फिसलने वाले को बना दिया दो कॉलेजों का डीन, राजनीतिक रसूख और भाई-भतीजावाद के आगे धरी रह गई योग्यता!

-महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर से लेकर जोबनेर-जोधपुर तक सिंडिकेट बेनकाब, विषय विशेषज्ञता की उड़ी धज्जियां, जूनियर अफसरों को मलाईदार पद, क्या फिर नपेगी कुलपतियों की कुर्सी?

उदयपुर/जयपुर। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में योग्यताओं और नियमों का खुलेआम कत्ल कर अपने चहेतों को उपकृत करने का एक महाघोटाला सामने आया है। राजभवन (राज्यपाल/कुलाधिपति) के स्पष्ट निर्देशों और वरिष्ठता के मापदंडों को पैरों तले रौंदते हुए कृषि विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रशासन ने डीन और डायरेक्टर (रिसर्च) जैसे गरिमामय पदों की बंदरबांट कर डाली है। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर से शुरू हुआ यह खेल अब जोबनेर और जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय तक गहराता नजर आ रहा है।

इंटरव्यू में बदला गया खेल, नंबर-1 वाले को किया बाहर:-

Expose Now की पड़ताल में सामने आया है कि चयन प्रक्रिया को रातों-रात अपने चहेतों के अनुकूल ढाला गया। राजस्थान कृषि कॉलेज (RCA) में डीन पद के लिए वरिष्ठता सूची में डॉ. आर.पी. मीणा, डॉ. एन.एल. महावर, डॉ. एम.के. महला और डॉ. के.के. यादव जैसे दिग्गज शीर्ष 5 स्थानों पर थे। लेकिन सत्ता और रसूख के गठजोड़ ने सबसे सीनियर प्रोफेसर डॉ. मीणा का आवेदन ही निरस्त कर दिया और 6ठे नंबर पर मौजूद डॉ. लोकेश गुप्ता को न केवल राजस्थान कृषि कॉलेज, बल्कि डेयरी कॉलेज का भी डीन बना दिया गया।

राजनीतिक पहुंच और सिंडिकेट का खुला खेल:-

नियमों की धज्जियां उड़ाने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा:

-होम साइंस कॉलेज: वर्षों का अनुभव रखने वाले डॉ. राजश्री और डॉ. प्रकाश जैसे वरिष्ठ प्रोफेसरों का हक मारकर भाजपा नेता ओंकार सिंह लखावत की पुत्री डॉ. सरला लखावत को डीन की कुर्सी सौंप दी गई।

-इंजीनियरिंग कॉलेज: सीनियर प्रोफेसर डॉ. विक्रमादित्य दवे की योग्यता को नजरअंदाज कर डॉ. विनोद यादव को डीन पद का तोहफा दिया गया।

-भीलवाड़ा कृषि कॉलेज: डॉ. आर.पी. मीणा, डॉ. के.सी. नागर और डॉ. सी.एम. यादव जैसे वरिष्ठों को दरकिनार कर डॉ. के.के. यादव को कुर्सी पर बैठाया गया।

-तकनीकी पदों पर गैर-विशेषज्ञों का कब्जा: तकनीकी व स्पेशलाइज्ड कॉलेजों में संबंधित विषय के विशेषज्ञों की जगह दूसरे विषयों के जूनियर शिक्षकों को बिठाकर पूरी शिक्षा प्रणाली का मजाक बना दिया गया है।

पूर्व कुलपति की बर्खास्तगी से भी नहीं लिया सबक:-

विश्वविद्यालय अधिनियम और कुलाधिपति के स्पष्ट आदेश हैं कि डीन और डायरेक्टर जैसे नीतिगत पदों पर वरिष्ठता, अनुभव और विषय की विशेषज्ञता अनिवार्य है। इसी तरह की धांधली और मनमानी के चलते जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति को बर्खास्त तक किया जा चुका है, बावजूद इसके विश्वविद्यालयों के इस ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’ में कोई खौफ नजर नहीं आ रहा।

अधिकारियों की लीपापोती और गोलमोल जवाब:-

जब इस बंदरबांट पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के कुलपति प्रो. प्रताप सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने “काबिलियत देखने और नियम अनुसार होने” का रटा-रटाया राग अलापा। वहीं रसूख के दम पर पद पाने वाले चेहरे “इंटरव्यू में चयन” का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

बड़ा सवाल: क्या शिक्षा के इन मंदिरों में खुलेआम चल रही इस मनमानी और योग्यता के कत्ल पर राजभवन व सरकार सख्त एक्शन लेगी या फिर रसूखदारों के आगे नियमों की बलि ऐसे ही चढ़ती रहेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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