जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में एक बार फिर गंभीर बजट संकट खड़ा हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) के तहत काम कर रहे संवेदकों का करीब 2500 करोड़ का भुगतान लंबे समय से अटक गया है। इस वित्तीय गतिरोध के चलते प्रदेश भर में चल रहे हर घर जल योजना के काम ठप होने के कगार पर पहुंच गए हैं, वहीं भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों ने फिर से आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
1500 संवेदक और हजारों श्रमिकों की आजीविका पर संकट:-
बजट की कमी और बिलों के निस्तारण में हो रही देरी का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है:
-1500 संवेदक प्रभावित: भारी पूंजी निवेश और बैंकों के कर्ज तले दबे संवेदकों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह डगमगा चुकी है।
-हजारों श्रमिकों पर मार: भुगतान नहीं मिलने से साइटों पर कार्यरत तकनीकी स्टाफ, प्लंबर, फिटर और श्रमिकों का वेतन महीनों से अटका है।
-अधूरी परियोजनाएं: पाइपलाइन बिछाने, टंकियों के निर्माण और नल कनेक्शन देने का काम कई जिलों में सुस्त या बंद हो चुका है।
पेयजल आपूर्ति ठप करने का अल्टीमेटम:-
संवेदक संघर्ष समिति ने PHED प्रशासन को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि यदि जल्द बकाया राशि जारी नहीं की गई, तो प्रदेश भर के ठेकेदार पूर्ण कार्य बहिष्कार और आंदोलन की राह पकड़ेंगे। ठेकेदारों ने इस बार सीधे तौर पर पेयजल सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में जनता के सामने गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।
घोटालों की जांच और बजट की दोहरी मार:-
राजस्थान में जल जीवन मिशन पहले से ही फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों, टेंडर अनियमितताओं और जांच एजेंसियों (ED व ACB) की कार्रवाई के चलते सुर्खियों में रहा है। जांच प्रक्रियाओं की आड़ में फाइलों की धीमी गति और ट्रेजरी से समय पर बजट जारी न होने के कारण फील्ड में वास्तविक काम करने वाले ठेकेदार भी भारी आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।
संवेदक संघर्ष समिति की मुख्य मांगें:-
-जेजेएम और नियमित मेंटेनेंस कार्यों के सभी लंबित बिलों का तुरंत भुगतान किया जाए।
-ट्रेजरी स्तर पर अटके फंड को क्लीयर करने के लिए विभाग तुरंत विशेष बजट की व्यवस्था करे।
-वित्तीय गतिरोध दूर करने के लिए विभाग और ठेकेदार प्रतिनिधियों के बीच तत्काल वार्ता आयोजित हो।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now