जयपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र और राज्य के साझा सहयोग से चलने वाले इस महत्वपूर्ण अभियान में पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल बजट आवंटन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। जहां शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त फंड की दरकार थी, वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 के बाद से बजट लगातार घट रहा है।
बजट में लगातार गिरावट का गणित:-
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, समग्र शिक्षा अभियान में मिलने वाली कुल राशि में सीधे तौर पर कमी आई है:
2023-24: कुल 5,334.15 करोड़ रुपये (केंद्र: 3,200.49 करोड़ | राज्य: 2,133.66 करोड़)
2024-25: गिरकर 5,151.08 करोड़ रुपये पर पहुंचा (केंद्र: 3,090.65 करोड़ | राज्य: 2,060.43 करोड़)
2025-26: घटकर मात्र 4,924.71 करोड़ रुपये रह गया (केंद्र: 2,954.82 करोड़ | राज्य: 1,969.88 करोड़)
लगातार घटते फंड से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विकास कार्यों, डिजिटल इनिशिएटिव्स, और बुनियादी सुविधाओं पर गहरा असर पड़ रहा है।

महत्वपूर्ण योजनाओं में बजट की भारी उपेक्षा:-
खर्च के ब्योरे से साफ है कि शिक्षा की जमीनी जरूरतों को दरकिनार किया जा रहा है:
-लाइब्रेरी और डिजिटल शिक्षा पर ब्रेक: प्राथमिक स्तर पर वर्ष 2023-24 में लाइब्रेरी ग्रांट के लिए शून्य (0.00) रुपये खर्च किए गए। वहीं आईसीटी (ICT) और डिजिटल पहलों के लिए मिलने वाला बजट बेहद नाममात्र का रहा।
-फीस पुनर्भरण (RTE) की स्थिति: वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में प्राथमिक स्तर पर आरटीई फीस पुनर्भरण (Reimbursement of Fee) और संबंधित मदों में बजट शून्य दर्ज किया गया है।
-नए विकास कार्यों की धीमी रफ्तार: वर्ष 2025-26 में गैर-आवर्ती (Non-Recurring Fresh) मद में नए कार्यों के लिए बजट आवंटन शून्य रहा, जिससे स्कूल भवनों के नवीनीकरण और नए इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लग गया है।

बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ वेतन में सीमित:-
समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाले भारी-भरकम फंड का अधिकांश हिस्सा केवल शिक्षकों के वेतन और प्रशासनिक खर्चों (Program Management/MMER) में ही खप रहा है। छात्रों की गुणवत्ता सुधार, नवाचार, खेलकूद और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित राशि का अनुपात बेहद कम रह गया है। शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के दावों के बीच लगातार घटता यह बजट सरकारी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now