-न बच्चे भर्ती हुए, न दवाएं बंटीं—फर्जी मरीजों और कागजी खपत के सहारे डेढ़ साल से चल रहा था सिंडिकेट
-2 की जगह 13 एंटीबायोटिक और 6 की जगह 24 सिरिंज… लोकल परचेज के नाम पर चहेती फर्मों को मलाई
-जांच टीम पहुंची तो अस्पताल में मचा हड़कंप, MOIC बोले- ‘आदेश लाओ’, अधीक्षक ने मानी धांधली
जयपुर। राजधानी जयपुर के सबसे बड़े बाल चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मासूम बच्चों के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले की सनसनीखेज साजिश बेनकाब हुई है। अस्पताल में न केवल ऐसे बच्चों के नाम पर दवाएं उठाई गईं जो कभी भर्ती ही नहीं हुए, बल्कि कच्ची पर्चियों और फर्जी बिलों के सहारे पिछले डेढ़ साल के भीतर सरकार के करीब 3 करोड़ रुपये के फंड का गबन कर लिया गया। ‘Expose Now’ की पड़ताल में सामने आया है कि सरकारी दवा की आपूर्ति होने के बावजूद जानबूझकर ‘लोकल परचेज’ (स्थानीय खरीद) का खेल रचा गया और सिंडिकेट बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
फर्जीवाड़े का पूरा ‘मोडस ऑपरेंडी’, ऐसे हुआ 3 करोड़ का खेल:-
-स्टॉक दबाकर लोकल खरीद का खेल: निशुल्क दवा योजना के तहत RMSCL (राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन) से प्रचुर मात्रा में दवाएं मिलने के बावजूद अस्पताल में दवाओं की ‘कृत्रिम कमी’ दिखाई गई और बाहर की चुनिंदा फर्मों से मनमाने दामों पर लोकल परचेज की गई।
-2 गुना से 4 गुना तक दिखाई गई फर्जी खपत: जो दवाएं स्टॉक में नहीं थीं, उनकी खपत 200% से 400% तक बढ़ाकर फर्जी बिल पास करवाए गए।
-कच्ची पर्चियों पर लाखों की डिलीवरी: इमरजेंसी काउंटर पर डॉक्टरों की वैध सील-साइन और आधिकारिक पर्चियों के बजाय रद्दी ‘कच्ची पर्चियों’ पर दवा और महंगे कंज्यूमेबल्स की सप्लाई दर्शा दी गई।
-कागजी मरीज (डमी पेशेंट्स): हीदा की मोरी, मानसरोवर, कानोता और टोंक के पते वाले ऐसे दर्जनों बच्चों के नाम पर भारी-भरकम दवाएं और सर्जिकल सामान काटा गया, जो असल में अस्पताल में कभी एडमिट ही नहीं हुए थे।
-चहेती फर्मों की सांठगांठ: विनायक, देवव्रत और के.के. एंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के जरिए कागजों में सप्लाई दिखाकर हर रोज फर्जी बिल बनाए और पास किए गए।
मासूमों के नाम पर इन महंगे मेडिकल आइटम्स में हुआ बड़ा गोलमाल:-
-हीमोडायलिसिस कैथेटर: (खून साफ करने वाली मशीन से जुड़ा जीवनरक्षक उपकरण)
-पूर लॉक्ड एंटी-रिफ्लेक्स 2 व 3 ल्यूमेन सेम: (एक साथ मल्टीपल दवा व ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए इस्तेमाल होने वाला महंगा कंज्यूमेबल)
-पूर एक्स-रो 30 सेमी (IV ट्यूब): बच्चों की नाजुक नसों के लिए काम आने वाली ट्यूब
-सेफोटैक्साइम 1 ग्राम व सेफ्ट्रियाक्सोन 1 ग्राम: गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन, निमोनिया व टाइफाइड के एंटीबायोटिक इंजेक्शन
-एडहेसिव रिमूवर: बच्चों की नाजुक त्वचा से बिना दर्द के पट्टी/ड्रेसिंग हटाने का केमिकल
जांच टीम पहुंची तो उड़ गए होश, पहले रोका फिर खुले राज:-
ड्रग कंट्रोलर विभाग द्वारा गठित विशेष जांच टीम पिछले 5 दिनों से जेके लोन अस्पताल के सरकारी ड्रग स्टोर, मेडिकल स्टोर और सप्लायर फर्मों के रिकॉर्ड खंगाल रही है। पड़ताल में सामने आया कि 18 अगस्त को जब टीम जांच के लिए पहुंची, तो एमओआईसी (MOIC) हरिमोहन मीणा ने टीम से सवाल दागे और कहा कि “पहले जांच के आदेश लाओ, फिर जांच होगी।” इसके बाद जब उच्चाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया, तब जाकर रिकॉर्ड सीज करने की कार्रवाई शुरू हुई।
जिम्मेदारों के बयान:
“ड्रग विभाग की ओर से गहन जांच की गई है। प्रथम दृष्टया दवा सप्लाई और रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई हैं।”
— डॉ. आर. एन. सेहरा (अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल)
“शिकायतों के आधार पर टीम ने सरकारी स्टोर और सप्लायर फर्मों पर छापा मारकर रिकॉर्ड की जांच की है। अंतरिम रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है, जांच जारी है।”
— अजय फाटक (ड्रग कंट्रोलर)
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now