जयपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उड़ाए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के होश: फर्जी दस्तावेजों से विदेश भेजे 2395 करोड़ रुपये, एफआईआर दर्ज

राजधानी जयपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ओर से फर्जी दस्तावेजों और आयकर विभाग के प्रमाण पत्रों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर अरबों रुपये विदेश भेजने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आयकर विभाग की फॉरेन एसेट्स इन्वेस्टिगेशन यूनिट की जांच में अब तक करीब 2,395 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए विदेश भेजे जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस बड़े फर्जीड़े के खुलासे के बाद आयकर विभाग ने जयपुर के पत्रकार कॉलोनी थाने में चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है।

बोगस फर्मों और ट्रस्टों के नाम पर किया खेल

आयकर विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी सीए ने कथित तौर पर बोगस फर्मों, संस्थाओं और ट्रस्टों के नाम पर विदेश में धन भेजने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण पत्र तैयार किए थे। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि ऐसे कई व्यक्तियों और संस्थाओं के नामों का गलत इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने या तो कभी अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल ही नहीं किया था या फिर उनकी घोषित आय बेहद कम थी। इसके बावजूद उनकी आय के अनुपात से कई गुना अधिक की रकम उनके नाम से विदेश ट्रांसफर कर दी गई।

देशभर में सर्वे के बाद जयपुर में हुआ बड़ा खुलासा

गौरतलब है कि आयकर विभाग की ओर से पिछले दिनों देशभर में विशेष कार्रवाई की गई थी। इसी कड़ी में फॉरेन एसेट्स इन्वेस्टिगेशन यूनिट की टीम ने जयपुर में सीए अभिषेक जैन से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर सर्वे किया। सर्वे की कार्रवाई पूरी होने के बाद जब रिकॉर्ड और दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की गई, तब विदेशों में धन भेजने से जुड़े लेनदेन और प्रमाण पत्रों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ।

अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में संकेत मिले कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच आरोपी सीए द्वारा भारी मात्रा में ‘फॉर्म 15-सीबी’ (Form 15-CB) जारी किए गए थे। विदेश में धन भेजने के लिए इन प्रमाण पत्रों का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि इन्हें जारी करने से पहले किसी भी तरह की जरूरी सत्यापन प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया।

40 फर्मों के नाम पर जारी किए 3,168 फॉर्म

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महज करीब 40 फर्मों के नाम पर कुल 3,168 फॉर्म 15-सीबी जारी किए गए थे। आयकर विभाग को पुख्ता संदेह है कि इन प्रमाण पत्रों में दर्शाई गई जानकारियों और वास्तविक वित्तीय स्थिति के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। विभाग की शुरुआती जांच में इन्हीं संदिग्घ प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब 2,395 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने की पुष्टि हुई है।

आपराधिक जांच और मनी ट्रेल की पड़ताल जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग की फॉरेन एसेट्स इन्वेस्टिगेशन यूनिट जयपुर के उप निदेशक (अन्वेषण) मिंटू लाल मीणा की शिकायत पर पत्रकार कॉलोनी थाने में औपचारिक मुकदमा दर्ज किया गया है। अब पुलिस और आयकर विभाग संयुक्त रूप से विदेश भेजी गई इस पूरी रकम की ‘मनी ट्रेल’ (Money Trail) खंगालने में जुटे हैं। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि यह रकम किन-किन खातों से ट्रांसफर हुई और विदेश में अंतिम रूप से किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुँची, साथ ही इस अवैध नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


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