जयपुर। राजस्थान में निवेश और रोजगार के नाम पर सरकारी परिसंपत्तियों को कौड़ियों के भाव निजी हाथों में सौंपने की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जयपुर जिले के जमवारामगढ़ तहसील के मूंड़ला स्थित ‘डॉ. बीआर अंबेडकर फाउंडेशन’ (अंबेडकर पीठ) को महज़ 2 लाख की चुकता पूंजी वाली एक निजी कंपनी को 10 साल की लीज पर देने की तैयारी प्रशासनिक गलियारों में अंतिम चरण में है।
कंपनी का प्रोफाइल और MoU का पूरा खेल
कंपनी का विवरण: तमिलनाडु (कोयंबटूर) में 1 अगस्त 2019 को रजिस्टर्ड ‘केसीएसपी प्रा. लि.’ (KCSP Pvt. Ltd.), जिसकी पेड-अप शेयर कैपिटल (चुकता पूंजी) मात्र 2 लाख है।
दावे और वादे: कंपनी ने ‘राइजिंग राजस्थान’ के तहत परिवहन विभाग से एमओयू (MoU) किया, जिसमें जयपुर में अंतर्देशीय जलयान प्रशिक्षण संस्थान (Inland Vessel Maritime Training Institute) स्थापित करने, 10 करोड़ का निवेश लाने और 2,000 रोजगार सृजित करने का दावा किया गया।
परियोजनाएं: कंपनी ने मैरीटाइम वेयरहाउस डेवलपमेंट हब, सेंटर फॉर मैरीन वेसल सेफ्टी एंड रेगुलेटरी एक्सीलेंस और राजस्थान मैरीटाइम इंडस्ट्रियल क्लस्टर जैसी बड़ी-बड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित कीं।
संसाधनों की मांग: एमओयू के तहत कंपनी ने सरकार से 5 एकड़ जमीन, शैक्षणिक भवन और छात्रावास मांगा था।
100 करोड़ की ‘अंबेडकर पीठ’ पर नजर कैसे पड़ी?
लीज का पैंतरा: एमओयू के एक साल बाद भी जब कंपनी को संसाधन नहीं मिले, तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने अंबेडकर पीठ परिसर का दौरा किया और सीधे इस पूरे 75 बीघा कैंपस को 10 साल के लिए किराए पर देने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया।
परिवहन विभाग की सिफारिश: परिवहन विभाग ने 30 जून 2026 को ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) को पत्र लिखकर कंपनी के प्रस्ताव पर अनुशंसा करते हुए इसे आगे बढ़ाया।
BIP का रुख: बीआईपी (BIP) ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (SJED) को पत्र भेजकर निर्णय लेने को कहा और लिखा कि यदि पीठ नहीं दे सकते, तो विभाग के अधीन अन्य कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध कराने की संभावना तलाशी जाए।
100 करोड़ की अंबेडकर पीठ: क्या है इसकी ज़मीनी हकीकत?
स्थापना: वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 75 बीघा 3 बिस्वा जमीन पर इसकी नींव रखी थी और 2008 में प्रशासनिक भवन का लोकार्पण हुआ था।
उद्देश्य: अनुसूचित जाति (SC) के छात्र-छात्राओं के लिए रिसर्च सेंटर और उच्च शिक्षण केंद्र विकसित करना।
इन्फ्रास्ट्रक्चर:
42,000 वर्ग फीट का पक्का निर्माण।
2 मंजिला प्रशासनिक भवन (18 कमरे, 2 बड़े हॉल)।
52 कमरों का बालक छात्रावास और 40 कमरों का बालिका छात्रावास।
विशाल लाइब्रेरी भवन।
वर्तमान स्थिति: 16 स्वीकृत पदों में से केवल 7 पद भरे हैं। 10 वर्षों में सिर्फ 9 शोधार्थियों को फेलोशिप मिली है (प्रत्येक को 3 साल में 5.40 लाख रुपये)। अधिकांश समय यह विशाल परिसर सुनसान पड़ा रहता है।
Expose Now के बड़े सवाल:
-वित्तीय क्षमता की अनदेखी क्यों?: क्या 2 लाख की शेयर पूंजी वाली कंपनी 10 करोड़ का निवेश और 2 हजार नौकरियां देने में सक्षम है? इसकी तकनीकी व वित्तीय स्क्रूटनी क्यों नहीं की गई?
-संस्थान के मूल उद्देश्य का हनन: जिस पीठ का गठन दलित व वंचित वर्ग के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान व शोध के लिए हुआ था, उसे मैरीटाइम (जलयान) ट्रेनिंग के लिए देने की सिफारिश किस आधार पर की गई?
-लापरवाही या मिलीभगत?: परिवहन विभाग और बीआईपी ने बिना वित्तीय पृष्ठभूमि और अनुभव परखे फाइल को इतनी तत्परता से आगे क्यों बढ़ाया?