जयपुर में डमी कैंडिडेट प्रकरण: भाई की नौकरी के लालच में खुद भी पहुंचा जेल, कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में हुआ था खेल
राजस्थान में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में फर्जीवाड़े और डमी कैंडिडेट के खिलाफ एसओजी (SOG) और पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में जयपुर पुलिस ने एक ऐसे शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी सरकारी नौकरी पाने की चाहत में अपने ही छोटे भाई की पहले से चल रही सरकारी नौकरी को दांव पर लगा दिया और उसे अपनी जगह परीक्षा में बैठा दिया। यह मामला साल 2020 की राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें अब दोनों भाई कानून के शिकंजे में आ चुके हैं।
परीक्षा में भाई को बैठाना पड़ा भारी
पुलिस जांच के अनुसार, यह पूरा मामला 7 नवंबर 2020 को आयोजित हुई राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (कांस्टेबल भर्ती-2019) का है। जयपुर के सोडाला थाना क्षेत्र स्थित चौधरी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जनता नगर, रांकड़ी) में जीआरपी अजमेर के लिए आवंटित एक परीक्षा केंद्र पर सोनू यादव की जगह उसका छोटा भाई मनोज कुमार यादव डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने पहुंचा था।
कैसे खुला राज और कब दर्ज हुआ मामला?
परीक्षा संपन्न होने के बाद जब दस्तावेजों और बायोमेट्रिक मिलान में गड़बड़ी की आशंका हुई, तो पुलिस मुख्यालय राजस्थान के भर्ती अनुभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी संजय यादव ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर वर्ष 2021 में सोडाला थाने में आईपीसी की धारा 419, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
वर्तमान में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर था तैनात छोटा भाई
इस सनसनीखेज मामले का सबसे चौकाने वाला पहलू यह है कि घटना के समय मुख्य आरोपी सोनू यादव का भाई मनोज कुमार यादव भिवाड़ी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात था। इतना ही नहीं, समय के साथ उसकी स्थिति बदली और वह वर्तमान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहा था। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डमी कैंडिडेट बने भाई मनोज कुमार यादव को 28 जुलाई 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया था।
5 हजार का इनामी मुख्य आरोपी सोनू गिरफ्तार
घटना के बाद से ही मुख्य आरोपी सोनू यादव (पुत्र अशोक कुमार यादव, निवासी शिवदानसिंहपुरा, नीमराणा, जिला कोटपूतली) लगातार फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन उसका सुराग नहीं मिल पा रहा था। पुलिस अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी पर 5 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।
जयपुर दक्षिण के पुलिस उपायुक्त राजर्षि राज के निर्देश पर फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक विशेष टीम का गठन किया गया था। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ललित कुमार शर्मा के निर्देशन, एसीपी सोडाला सत्येंद्र सिंह नेगी और थानाधिकारी मनोज बेरवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी और मानवीय खुफिया तंत्र की मदद से आखिरकार मुख्य आरोपी सोनू यादव को धर दबोचा। पुलिस अब आरोपी से यह पता लगाने के लिए पूछताछ कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे।