जयपुर: पढ़े-लिखे नौजवान, जो कम समय में अमीर बनने का सपना देखते हैं या अच्छी डिग्री के बाद मनमुताबिक नौकरी न मिलने पर विदेश जाना चाहते हैं, वे सावधान हो जाएं! सोशल मीडिया के जरिए विदेश में नौकरी लगवाने का झांसा देने वाले शातिर ठग आपको बड़े आपराधिक दलदल यानी ‘डिजिटल साइबर स्लेवरी’ (साइबर गुलामी) का शिकार बना सकते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों समेत राजस्थान में सामने आई वारदातों ने इस भयानक सच का खुलासा किया है।
देशभर में बड़े पैमाने पर डिजिटल साइबर गुलामी करवाई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि मार्च 2025 से लेकर जुलाई 2026 तक राजस्थान में साइबर स्लेवरी के 21 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। ये मुकदमे झुंझुनू (कोतवाली), अलवर, उदयपुर, चूरू, राजसमंद, अजमेर, श्रीगंगानगर, जयपुर और डीडवाना-कुचामन में दर्ज किए गए हैं। कई बार पीड़ितों को खुद पता ही नहीं होता कि वे इस दलदल में फंस चुके हैं।
कैसे फैला है यह पूरा इंटरनेशनल सिंडिकेट?
साइबर स्लेवरी का यह मकड़जाल सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के अलावा अफ्रीका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और वियतनाम तक इसकी जड़ें फैली हैं।
- मास्टरमाइंड: इस पूरे नेटवर्क को साउथ ईस्ट एशिया के देशों—चीन, बैंकॉक, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, लाओस और म्यांमार से संचालित किया जा रहा है।
- चाइनीज कनेक्शन: इस पूरी गैंग के सरगना चीन से जुड़े हैं, जो अलग-अलग देशों में अपने एजेंटों के जरिए यह नेटवर्क चला रहे हैं। चीनी आका भोले-भाले युवाओं को फंसाने के लिए एजेंटों को मोटा कमीशन देते हैं।
- एक्शन: भारत सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देश पर म्यांमार के इन अड्डों पर कार्रवाई करते हुए सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू कर भारत लाया गया है। इनमें राजस्थान के 71 लोग शामिल हैं, जिन्हें उनके परिवार को सकुशल सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही, राजस्थान पुलिस ने ऐसे 11 संदिग्ध एजेंटों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में मोबाइल फोन बरामद किए हैं और उनके खिलाफ बीएनएस, इमीग्रेशन एक्ट तथा आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की है।




जाल में ऐसे फंसाते हैं शातिर ठग
साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवा (राजस्थान पुलिस) के एडीजी वी.के. सिंह के मुताबिक, ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर डेटा एंट्री ऑपरेटर, कस्टमर सपोर्ट, होटल वेटर और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसी नौकरियों के फर्जी विज्ञापन देते हैं।
- फर्जी लुभावने ऑफर: आकर्षक सैलरी और मुफ्त रहने-खाने का सपना दिखाकर युवाओं को फंसाया जाता है।
- टूरिस्ट वीजा का खेल: वैध वर्क वीजा के बजाय कई बार युवाओं को टूरिस्ट वीजा पर विदेश (कंबोडिया, म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) भेज दिया जाता है।
- दस्तावेज जब्ती: गंतव्य देश पहुंचते ही एयरपोर्ट या ऑफिस में एजेंट उनके पासपोर्ट और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लेते हैं।
- मजबूरी का फायदा: विदेश पहुंचने पर उन्हें बताया जाता है कि उनकी नौकरी खत्म हो चुकी है और लौटने का कोई रास्ता नहीं बचता। इसके बाद शुरू होती है असली साइबर गुलामी। पीड़ितों से ऑनलाइन ठगी, मैट्रिमोनियल फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन, क्रिप्टो फ्रॉड और सोशल मीडिया स्कैम जैसे अपराध जबरन करवाए जाते हैं।


ऐसे पहुंचते हैं चीन के सीक्रेट ‘स्कैम कंपाउंड्स’ तक
थाईलैंड या बैंकॉक पहुंचने के बाद अवैध रूप से चोरी-छिपे बैंकॉक-कंबोडिया से नोमपेन होते हुए, तीन दिन तक जंगल और नदियों के रास्ते बर्मा (म्यांमार) पहुंचाया जाता है। इस दौरान घंटों पैदल चलना, बाइकों और कारों से सफर करना पड़ता है।
म्यांमार में नदी किनारे हजारों की तादात में बड़े-बड़े ‘स्कैम कंपाउंड्स’ (बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स) बने हैं। इन्हें अपोलो पार्क, केके पार्क 1, केके पार्क 2 जैसे नामों से जाना जाता है। इनमें अफ्रीका, पाकिस्तान, वियतनाम, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भारत से आए लोग डिजिटल साइबर गुलाम बनकर रहते हैं। चीनी सरगना इन एजेंटों को हर व्यक्ति के बदले 5-5 लाख रुपये तक चुकाते हैं।
10×10 का कमरा, 8-8 घंटे टॉर्चर और खौफनाक ट्रेनिंग
म्यांमार के इन स्कैम कंपाउंड्स में 10×10 के कमरों में 8-8 लोगों को रखा जाता है। गैजेट्स छीन लिए जाते हैं और साइबर ठगी की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है—जैसे सेक्सटॉर्शन करना, डिजिटल अरेस्ट करना, यूएसडीटी (USDT) और क्रिप्टोकरंसी के नाम पर ठगी करना।
- कैदियों जैसी जिंदगी: ये कंपाउंड पूरी तरह जेल जैसे होते हैं। मात्र 4 से 5 घंटे सोने की अनुमति होती है। हर गुलाम को ठगी के 8-8 टास्क दिए जाते हैं। बातचीत के लिए जो मोबाइल (जैसे आईफोन 12 और 8) दिए जाते हैं, उनके पीछे के कैमरे तोड़ दिए जाते हैं ताकि कोई संपर्क न कर सके।
- खौफनाक सजा: डीआईजी शांतनु कुमार (साइबर क्राइम) के अनुसार, ट्रेनिंग में फेल होने पर या विरोध करने पर पीड़ितों को सड़े हुए अंडे खिलाए जाते हैं, 10 मंजिला इमारत पर पानी से भरी बाल्टियां लेकर चढ़ाया-उतारा जाता है, 8-8 घंटे धूप में खड़ा रखा जाता है। कई बार मारपीट, महिलाओं के साथ रेप जैसी घटनाएं और विरोध करने पर मौत के घाट उतारकर लीवर-किडनी जैसे बॉडी पार्ट्स तक बेच दिए जाते हैं।


देश में नौकरी के नाम पर ‘साइबर गुलामी’ का सच
Expose Now: सर, विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को ‘साइबर गुलाम’ कैसे बनाया जा रहा है?
महेंद्र कुमार, POE (Protector of Emigrants): अवैध एजेंट युवाओं को अच्छी नौकरी का लालच देकर ‘टूरिस्ट वीजा’ पर म्यांमार, थाईलैंड या कंबोडिया भेज देते हैं। वहां पहुंचते ही माफिया उनके पासपोर्ट छीन लेते हैं और उन्हें जबरन साइबर ठगी (Cyber Slavery) करने के लिए बंधक बना लेते हैं।
Expose Now: इस ठगी के जाल से बचने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है?
महेंद्र कुमार: पूरे देश में यह नेटवर्क फैला है। राजस्थान में हमारे पास करीब 100 अधिकृत (Registered) एजेंसियां हैं। जो अवैध रूप से काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ हम पुलिस के साथ मिलकर लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।
Expose Now: अगर कोई विदेश में इस जाल में फंस जाए, तो वह वापस कैसे आ सकता है?
महेंद्र कुमार: पीड़ित या उनका परिवार तुरंत सरकार के ‘मदद पोर्टल’ (MADAD) या PBSK हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराए। इसके बाद हमारा विभाग वहां स्थित भारतीय दूतावास (Embassy) के साथ मिलकर उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू करवाता है।
Expose Now: जो युवा विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देंगे?
महेंद्र कुमार: मेरी दो सबसे बड़ी सलाह हैं:
कभी भी ‘टूरिस्ट वीजा’ पर नौकरी करने न जाएं, हमेशा ‘एम्प्लॉयमेंट वीजा’ (Employment Visa) ही लें।
किसी भी एजेंट को पैसे देने से पहले विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक करें कि वह एजेंट रजिस्टर्ड है या नहीं।

पीड़ितों की जुबानी: दर्दनाक आपबीती
- उदयपुर के रहने वाले विष्णुकांत पालीवाल ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उन्हें विदेश में नौकरी का ऑफर मिला था। बैंकॉक पहुंचने पर उन्हें एक होटल में रोककर कहा गया कि वह पोस्ट खत्म हो गई है। इसके बाद उन्हें जबरन हथियारों और डर के साये में स्कैम कंपाउंड ले जाया गया, जहां चीनी लीडर्स ने मारपीट कर मोबाइल छीन लिए और जबरन इन्वेस्टमेंट-ट्रेडिंग फ्रॉड के तरीके सिखाए।
- डूंगरपुर निवासी चिराग जैन पर 18 लाख रुपये का कर्ज था। कर्ज चुकाने के लिए एजेंट के झांसे में आकर वे दुबई/थाईलैंड होते हुए अवैध रूप से म्यांमार पहुंच गए। चीनी माफियाओं ने उन्हें कमरे में बंद कर साइबर गुलाम बनाया और एक दिन में 5 से 10 लाख डॉलर के फ्रॉड करवाए। विरोध करने पर भयानक प्रताड़ना दी जाती थी।
म्यांमार के स्कैम से बचे राजस्थानी युवक की खौफनाक कहानी
Expose Now: आप म्यांमार के इस ठगी के जाल में कैसे फंसे?
पीड़ित: काम की तलाश में दुबई गया था। वहां एक एजेंट ने 85 हजार रुपये महीने का लालच देकर मुझे थाईलैंड के रास्ते धोखे से म्यांमार के ‘केके पार्क’ (KK Park) में बेच दिया।
Expose Now: वहां आपसे क्या काम करवाया जाता था?
पीड़ित: वहां चीनी बॉस जबरन अमेरिकियों से सोशल मीडिया पर दोस्ती करवाते और फिर क्रिप्टो करेंसी (Crypto) में इन्वेस्ट करने के नाम पर रोज करोड़ों की ठगी करवाते थे। जो मना करता, उसे बुरी तरह पीटा जाता था। मैंने काम करने से मना कर दिया था।
Expose Now: फिर आप वहां से बचकर कैसे निकले?
पीड़ित: कुछ समय बाद वहां कैंप पर आर्मी का हमला हो गया। उसी अफरातफरी में मुझे बाहर निकलने का मौका मिला और मैंने म्यांमार आर्मी के सामने सरेंडर कर अपनी जान बचाई।
Expose Now: आपको यह खतरा मोल लेकर विदेश क्यों जाना पड़ा?
पीड़ित: मुझ पर गांव के ही एक सूदखोर का भारी कर्ज था। उसने 18 लाख के कर्ज के बदले मुझसे 90 लाख रुपये वसूल लिए, मेरी दुकान बिकवा दी और मुझ पर फर्जी केस कर दिया। उसी कर्ज को चुकाने के दबाव में मैं इस जाल में फंसा था। अब मैं न्याय की गुहार लगा रहा हूँ।
सरकार और पुलिस की सख्त सलाह: कैसे बचें?
विदेश में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) और राजस्थान पुलिस ने कड़े निर्देश जारी किए हैं:
- एजेंसी की जांच करें: विदेश जाने से पहले रिक्रूटमेंट एजेंसी की वैधता विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक वेबसाइट से जरूर जांच लें।
- टूरिस्ट वीजा पर नौकरी नहीं: हमेशा वैध रोजगार (वर्क) वीजा पर ही विदेश जाएं। टूरिस्ट वीजा पर कभी नौकरी न करें।
- दस्तावेज सुरक्षित रखें: पासपोर्ट, वीजा और कॉन्ट्रैक्ट लेटर की डिजिटल कॉपी अपने परिवार के पास सुरक्षित रखें। विदेश में मौजूद भारतीय दूतावास का संपर्क नंबर हमेशा पास रखें।
- शक करें: सोशल मीडिया या अखबारों में दिखने वाले उन जॉब ऑफर्स पर भरोसा न करें जो बिना इंटरव्यू या स्किल टेस्ट के मोटी सैलरी का दावा करते हैं। अनजान व्यक्ति को अपने मूल दस्तावेज न सौंपें।
अवैध रूप से चल रही एजेंसिया, जिसे MEA ने प्रतिबंधित किया है





मदद के लिए संपर्क करें:
यदि कोई इस तरह के फ्रॉड का शिकार होता है, तो विदेश में स्थित भारतीय दूतावास या विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल की मदद लें। भारत में ऐसी साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में सूचना दें।
