पेपर लीक माफिया पर हाईकोर्ट का बड़ा हथौड़ा! धांधली करने वाले 4 आरोपियों की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा- ‘यह पारदर्शिता पर सीधा हमला’

राजस्थान हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफियाओं के खिलाफ एक बार फिर अपना कड़ा रुख अख्तियार किया है। केंद्रीय सरकार की ‘सेन्ट्रल कौंसिल फोर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस (CCRAS)’ में मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के मामले में कोर्ट ने चार आरोपियों को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

न्यायाधीश प्रमिल कुमार माथुर की बेंच ने सूरज सिंह धनगर, सागर करुवान, गौरव कुमार मीना और मदन सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की है।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘यह सार्वजनिक पारदर्शिता पर सीधा हमला’

कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध न केवल पात्र और मेहनती अभ्यर्थियों के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सीधा हमला हैं। इससे व्यवस्था में जनता का भरोसा कम होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में धांधली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है।

कोर्ट ने आरोपियों की दलील खारिज करते हुए कहा कि वे निष्क्रिय कर्मचारी नहीं, बल्कि धांधली के ‘सक्रिय साजिशकर्ता’ हैं। कोर्ट ने साफ किया कि गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताए जाने मात्र से किसी को जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता।

क्या था पूरा मामला और कैसे बंटी सॉल्व्ड आंसर शीट?

आरोपियों के खिलाफ कोटा के आरकेपुरम थाने में साल 2025 में एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, परीक्षा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर अभ्यर्थियों को हल किए गए उत्तर और नकल सामग्री मुहैया कराई थी।

  • सूरज सिंह धनगर: क्लस्टर हेड और परीक्षा प्रभारी था, जिसने परीक्षा केंद्र की वास्तविक स्थिति प्रशासन से छिपाई।
  • सागर करुवान: इसने अभ्यर्थियों को मोबाइल के प्रयोग की अनुमति दी और ‘सॉल्व्ड आंसर शीट’ बांटी।
  • मदन सिंह: यह परीक्षा केंद्र का पार्टनर था और पूरी व्यवस्था में सहयोग दे रहा था।
  • गौरव मीना: इसे इस धांधली के लिए 50,000 रुपए मिले थे।

CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन से इन चारों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता साबित हुई है, जिसके बाद कोर्ट ने इन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।


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