राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) के मुख्य द्वार पर छात्रसंघ चुनाव की बहाली और 13 प्रमुख मांगों को लेकर चल रहा छात्रों का धरना 19वें दिन भी जारी रहा। शांतिपूर्ण चल रहे इस धरने ने अब एक बड़े खुलासे का रूप ले लिया है। शनिवार को धरने पर बैठे छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के खेल विभाग में व्याप्त कथित भारी भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों के बजट के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन की पोल खोल दी है।
छात्र नेताओं का बड़ा आरोप: ‘फ्री’ कैंप के नाम पर अवैध वसूली
धरना स्थल पर मौजूद छात्र नेता अरविंद नागल, लोकेन्द्र सिंह, रविराज गोदारा, प्रदीप मांडोता और विकास फौजदार ने खेल विभाग के ‘खेल’ को सार्वजनिक किया। छात्रों का आरोप है कि खेल विभाग में विद्यार्थियों से विभिन्न खेल सुविधाओं के नाम पर अवैध रूप से शुल्क वसूला जा रहा है।
- समर कैंप घोटाला: जिस समर कोचिंग कैंप को आधिकारिक तौर पर ‘निःशुल्क’ घोषित किया गया था, उसमें भी विद्यार्थियों से पैसे ऐंठे गए।
- वित्तीय अनियमितताएं: ऑल इंडिया हैंडबॉल प्रतियोगिता के नाम पर हुए खर्चों में भारी धांधली की आशंका जताई गई है।
- मैदानों का दुरुपयोग: खेल मैदानों के रखरखाव के नाम पर गोलमाल और बाहरी व्यक्तियों को अवैध तरीके से खेल मैदान उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।






वीसी को ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग
छात्र नेताओं ने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय के करोड़ों रुपये के बजट का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हुए उन्होंने मांग की है कि खेल विभाग सहित विश्वविद्यालय में हुए सभी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन एवं विकास कार्यों की एक निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि आमजन के सामने असली सच आ सके। इन सभी मांगों को लेकर कुलगुरु (VC) महोदया के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया है।




उग्र आंदोलन की चेतावनी
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को खुली चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए, 13 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ और खेल विभाग के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कराई गई, तो यह छात्र आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा। भविष्य में बिगड़ने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
