जयपुर: देश के सरकारी गोदामों में भंडारण की व्यवस्था और अनाज की बर्बादी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। लोकसभा में नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल और उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर द्वारा पूछे गए अतारांकित सवाल के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़े संसद के पटल पर रखे हैं। सरकार के अनुसार, इन पांच वर्षों में देश भर के गोदामों में 36 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का 41,758 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ है।

सरकार का स्पष्टीकरण और कारण
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने लोकसभा में बताया कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में जर्जर या अपर्याप्त व्यवस्था के कारण सेंट्रल पूल के गेहूं और चावल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। जो भी खाद्यान्न खराब हुआ है, उसके पीछे मुख्य कारण चक्रवात, बाढ़ और अत्यधिक बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं रहीं हैं। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले 18 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई है।
पिछले 5 वर्षों में खराब हुए अनाज का साल-दर-साल आंकड़ा
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले पांच वर्षों के दौरान अनाज की बर्बादी इस प्रकार रही:
- वर्ष 2021-22: 3,456 मीट्रिक टन अनाज खराब (लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य)।
- वर्ष 2022-23: 2,922 मीट्रिक टन अनाज खराब (लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य)।
- वर्ष 2023-24: 18,262 मीट्रिक टन अनाज खराब।
- वर्ष 2024-25: 14,055 मीट्रिक टन अनाज खराब।
- वर्ष 2025-26: 3,063 मीट्रिक टन अनाज खराब।
किन राज्यों में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच साल के आंकड़ों में पंजाब नुकसान के मामले में टॉप पर है। पंजाब के अलावा हरियाणा और तमिलनाडु में भी बड़े पैमाने पर अनाज क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि राजस्थान में भी भारी बर्बादी दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम और त्रिपुरा इस मामले में पूरी तरह सुरक्षित रहे, जहाँ पिछले 5 साल में एक किलोग्राम अनाज का भी नुकसान नहीं हुआ यानी खराबा ‘शून्य’ रहा है।
खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अब उसका सुरक्षित भंडारण और रखरखाव सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
