जयपुर: राजस्थान में रीट-2021 पेपर लीक का मामला एक बार फिर गरमा गया है। राज्य के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 11 पन्नों का एक विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें मामले की व्यापक और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। पत्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं, पूर्व सीएमओ अधिकारियों, राजीव गांधी स्टडी सर्किल (RGSC) के पदाधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
प्रमुख नेताओं और संगठनों से पूछताछ की मांग
डॉ. मीणा ने अपने पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग, कुछ विधायकों, तत्कालीन सीएमओ अधिकारियों तथा गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड गवर्नेंस (GISSG) और RGSC से जुड़े पदाधिकारियों से गहन पूछताछ कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका आरोप है कि पर्याप्त साक्ष्य और ईडी (ED) में प्रकरण दर्ज होने के बावजूद प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
कोलकाता की प्रिंटिंग प्रेस और बोर्ड अध्यक्ष के बयान पर खुलासे
- नियमों के विरुद्ध प्रिंटिंग प्रेस: पत्र में आरोप लगाया गया है कि रीट-2021 का प्रश्नपत्र छापने का ठेका नियमों के विपरीत कोलकाता की सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया। तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री डोटासरा, सुभाष गर्ग और सीएमओ के दबाव में यह ठेका देने का आरोप है।
- जारोली का व्हाट्सएप मैसेज: डॉ. मीणा ने उल्लेख किया कि पद से हटाए जाने के बाद 4 फरवरी 2022 को जारोली ने व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजकर कहा था कि उन्हें ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है और राजनीतिक दबाव में यह काम किया गया था।
डोटासरा और RGSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप
- पत्र में दावा किया गया कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रश्नपत्र प्राप्त कर उसे सीकर के प्रिंस कॉलेज, कलाम कोचिंग और भरतपुर के मदर टेरेसा संस्थान समेत लगभग 20 परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की, जहां 24-25 सितंबर 2021 को अभ्यर्थियों से पेपर हल करवाए गए।
- नियमों के विपरीत जयपुर में गैर-सरकारी व्यक्ति डॉ. प्रदीप पाराशर को जिला समन्वयक बनाया गया, जो RGSC से जुड़े थे।
- पत्र में आरोप लगाया गया कि RGSC से जुड़े लोगों के माध्यम से राज्यभर में लगभग 40 परीक्षा केंद्रों पर समन्वयकों की नियुक्ति की गई और करोड़ों रुपये के लेन-देन का एक हिस्सा कांग्रेस संगठन तक पहुंचाया गया। परीक्षा में 1.23 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के 140 से अधिक अंक आने को भी बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन का संकेत बताया गया है।
सुभाष गर्ग की भूमिका और SOG-ACB जांच पर सवाल
डॉ. मीणा ने सुभाष गर्ग के पुराने कार्यकाल (2011 और 2013) का हवाला देते हुए कहा कि तब भी ओएमआर शीट तैयार करने का काम नियमों के विरुद्ध एक फर्म को दिया गया था। एसीबी में मामला दर्ज होने के बावजूद उनका नाम हटाए जाने और एसओजी द्वारा कलाम कोचिंग की पुस्तिका की फोरेंसिक जांच न किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, रायसर के पास रीट का पेपर ले जा रहे कंटेनर के संदिग्ध सड़क हादसे की भी दोबारा जांच कराने की मांग की गई है।
डॉ. मीणा ने केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया है कि इन सभी कड़ियों और वित्तीय लेन-देन (CDR, बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन) की केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
