जयपुर: नीरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की मृत्यु के मामले ने पूरे शिक्षा तंत्र और निजी विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं。इस दुखद घटना के आठ महीने बाद चार्जशीट दाखिल होने पर संयुक्त अभिभावक संघ और अमायरा के परिजनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है。

UPDATE: अमायरा केस में चालान पेश
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पुलिस थाना मानसरोवर द्वारा तैयार की गई चार्जशीट अदालत में पेश की गई। इसमें मुख्य रूप से सौरभ मोदी, इन्दु दुबे, पुनिता शर्मा और रामू को अभियुक्त बनाया गया है। अभियोजन पक्ष ने अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.) की धारा 103(1), 238(C) तथा जे.जे. एक्ट की धारा 75 के तहत आरोप लगाए हैं।
न्याय की अधूरी लड़ाई और परिजनों का दर्द
अमायरा के माता-पिता, विजय मीणा और शिवानी, ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है。 उन्होंने आरोप लगाया कि अमायरा लगातार मदद के संकेत दे रही थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया。 उनके अनुसार, यह घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि एक कोमल मन को दी गई इतनी गहरी मानसिक प्रताड़ना है कि बच्ची ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया。
संयुक्त अभिभावक संघ का बड़ा खुलासा
संयुक्त अभिभावक संघ ने घटना के दिन का सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
- संघ का दावा है कि क्लास में टीचर की मौजूदगी के बावजूद, कुछ बच्चों ने अपने मनोरंजन के लिए अमायरा को इतना प्रताड़ित और शर्मसार किया कि वह उसे सहन नहीं कर सकी。
- संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन ‘बिट्टू’ ने कहा कि यह घटना निजी विद्यालयों की बाल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है。
- संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल का मानना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जवाबदेही का सवाल है。
मुख्य मांगें
परिजनों और संयुक्त अभिभावक संघ ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- दोषियों की गिरफ्तारी: मामले में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय हो और उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए。
- सख्त कानूनी धाराएं: पुलिस से मांग की गई है कि मामले में ‘एबेटमेंट’ (उकसावे) की धाराएं जोड़ी जाएं और स्कूल प्रबंधन व प्रिंसिपल के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट की धारा 75 के तहत कार्रवाई हो。
- सुरक्षा मानक: निजी स्कूलों में बाल सुरक्षा, एंटी-बुलिंग व्यवस्था, प्रशिक्षित काउंसलर और सीसीटीवी निगरानी को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाए。
अभिभावकों के लिए संदेश
इस प्रकरण के माध्यम से संयुक्त अभिभावक संघ ने सभी माता-पिता को जागरूक रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों से गहरी दोस्ती करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। यदि माता-पिता बच्चों के साथ आत्मीयता नहीं बढ़ाएंगे, तो बच्चे अपनी परेशानियां साझा नहीं कर पाएंगे और मन ही मन घुटकर गलत कदम उठा सकते हैं。
