-अजमेर रोड हादसा: जब रक्षक ही सो जाएं, तो भक्षक सड़कों पर मचाते हैं कोहराम, जयपुर में 3 मासूमों और पिता की मौत का जिम्मेदार कौन?
जयपुर। राजधानी के अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाइपास पर मंगलवार सुबह जो कुछ भी हुआ, उसने न केवल मानवता को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि हमारे परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। मुख्य सड़क और सर्विस रोड के बीच नाले पर बने डिवाइडर पर बैठकर बस का इंतजार कर रहे एक हंसते-खेलते परिवार को एक तेज रफ्तार, बेकाबू ट्रोले ने बेरहमी से कुचल दिया।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में तीन मासूम बच्चों और उनके पिता की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, बच्चों की मां जिंदगी और मौत के बीच एसएमएस अस्पताल में जंग लड़ रही है, जहां उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों पैर काटने पड़े।

‘कागजी शेर’ बना परिवहन विभाग: 12 चालान, फिर भी ट्रोला बेखौफ!
‘Expose Now’ के खोजी विश्लेषण में जो सच सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला और गुस्से से भर देने वाला है। जिस ट्रोले ने इस परिवार को उजाड़ा, वह कोई आम वाहन नहीं बल्कि सड़कों पर दौड़ता हुआ ‘आदतन अपराधी’ था। इस वाहन पर यातायात नियमों के उल्लंघन के कुल 12 चालान हो चुके हैं। अकेले इसी साल 6 चालान काटे गए, जिनमें से 5 चालान महीनों से लंबित पड़े हैं।
बड़ा सवाल: जब एक वाहन लगातार नियमों की धज्जियां उड़ा रहा था, तो उसे सीज क्यों नहीं किया गया? आखिर किसके संरक्षण में यह ‘मौत का ट्रोला’ जयपुर की सड़कों पर खुलेआम दौड़ रहा था?
वाहन और मालिक की कुंडली
ट्रोला मालिक का नाम: प्रेमवीर सिंह राठौड़
पता 1: 65, फ्रेंड्स कॉलोनी, सिरसी रोड, जयपुर
पता 2: 123, नई पोल, सिनली, जोधपुर
पंजीकरण: जोधपुर आरटीओ (RTO)
लापरवाही के दस्तावेज: ये हैं वो जिम्मेदार, जिनकी आंखों के सामने कटते रहे चालान
‘Expose Now’ उन अधिकारियों के नाम उजागर कर रहा है, जिन्होंने सिर्फ चालान काटने की रस्म अदायगी की, लेकिन धरातल पर कोई सख्त एक्शन नहीं लिया:
तारीख अथॉरिटी / स्थान चालान राशि जिम्मेदार अधिकारी का नाम व पद
2 अप्रैल डीटीओ सुजानगढ़ 1,700 बंजरंग खीचड़, कार्यवाहक DTO
15 अप्रैल आरटीओ बीकानेर 2,500 अनिल पंड्या, RTO बीकानेर
23 अप्रैल जयपुर ट्रैफिक पुलिस 1,500 योगेश गोयल, डीसीपी ट्रैफिक जयपुर
6 जून डीटीओ नागौर 2,000 अवधेश चौधरी, डीटीओ नागौर
3 जुलाई सीकर आरटीओ 5,000 मथुराप्रसाद मीणा, आरटीओ सीकर
8 जुलाई घटना स्थल: अजमेर रोड, जयपुर चंपालाल, आरटीओ जयपुर प्रथम
Expose Now की तीखी टिप्पणी, ये हादसा नहीं, ‘सिस्टम मर्डर’:-
इन चार जिंदगियों को ट्रोले ने नहीं, बल्कि हमारे लचर और संवेदनहीन सिस्टम ने कुचला है। नियम कहते हैं कि बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहनों का परमिट निरस्त होना चाहिए, भारी जुर्माना न भरने पर वाहन जब्त होना चाहिए और चालक का लाइसेंस सस्पेंड होना चाहिए। लेकिन यहाँ क्या हुआ? एक विभाग चालान काटता रहा, दूसरा वसूली भूल गया और तीसरे ने इस खूनी वाहन को सड़क पर बेखौफ दौड़ने की मूक सहमति दे दी। चालान की फाइल बंद कर देना कानून का पालन नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना है।
जब तक ऐसे मामलों में इन कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, जब तक इनके खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सड़कों पर मौत यूं ही बेखौफ नाचती रहेगी और बेगुनाह लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे। ‘Expose Now’ प्रशासन से मांग करता है कि केवल ड्राइवर को पकड़कर इतिश्री न की जाए, बल्कि इस लापरवाही में शामिल हर उस अधिकारी को कटघरे में खड़ा किया जाए जिसकी सुस्ती ने आज एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
