जयपुर: भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति और राष्ट्रीय चिंतन को एक नया और सार्थक मंच प्रदान करने के लिए राजस्थान की राजधानी जयपुर पूरी तरह तैयार है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच ‘लोकमंथन 2026’ की तैयारियों का औपचारिक शंखनाद हुआ।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस आयोजन को राष्ट्र की वैचारिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का “महायज्ञ” बताते हुए इसकी स्वागत एवं आयोजन समिति की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया और ‘लोकमंथन’ की आधिकारिक वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। आगामी 4 से 6 दिसंबर तक जयपुर में होने वाले इस राष्ट्रीय लोकमंथन का मुख्य विषय “हम भारत के लोग” रखा गया है।
“राजस्थान भक्ति और शक्ति की धरती, विकास और विरासत चलेंगे साथ” – CM भजनलाल शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लोकमंथन के 5वें संस्करण के लिए राजस्थान का चयन होना बहुत ही गौरव की बात है। उन्होंने कहा, “यह महाराणा प्रताप और मीराबाई की धरती है और यह कार्यक्रम ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से भरे लोगों का एक अनूठा प्रयास है।”

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की गहराई को समझाते हुए बताया कि भारत में हर काम की शुरुआत गांव की चौपाल से होती है। “राजस्थान में होने वाली रामलीला और रासलीला का मंचन भी एक तरह का लोकमंथन ही होता था, जिसे देखकर व्यक्ति के मन में श्रेष्ठ बनने का भाव पैदा होता था।” उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बल मिला है और हमें विकास और विरासत दोनों को एक साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
“सार्थक संवाद से ही सशक्त होगा भविष्य का भारत” – जे. नंदकुमार
इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने प्राचीन भारतीय संवाद परंपरा को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक टीवी चैनलों और सार्वजनिक मंचों पर जो बहसें होती हैं, वे भारतीय संवाद परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।

नंदकुमार ने कहा, “भारत का निर्माण सार्थक संवाद से हुआ है। भारतीय संवाद का उद्देश्य किसी से विवाद करना या उसे पराजित करना नहीं, बल्कि स्वयं ज्ञान प्राप्त करना और दूसरों को ज्ञान देना है— ‘Not to debate and win, but to know and let others know.’“
उन्होंने बताया कि लोकमंथन का पहला कार्यक्रम “उपनिवेशवाद से भारतीय मानस की मुक्ति” पर केंद्रित था। उन्होंने सार्थक संवाद के चार मूल तत्व बताए:
- स्वस्थता: सत्य की खोज और तत्वज्ञान का आदान-प्रदान।
- रचनात्मकता: समाज के लिए नए विचारों का सृजन।
- निरंतरता: रचनात्मक संवाद की प्रक्रिया का अबाध रूप से चलना।
- बहुआयामिता: पाश्चात्य संस्कृति की तरह यह सिर्फ ‘मोनोलॉग’ (एकांगी चर्चा) नहीं है, बल्कि इसमें संपूर्ण सृष्टि और समाज शामिल है।
नंदकुमार ने विशेष रूप से कहा कि लोकमंथन का उद्देश्य संवाद को केवल शहरों या प्रबुद्ध वर्ग तक सीमित रखना नहीं है। भारत की संवाद परंपरा को जंगलों में रहने वाले वनवासियों, गांवों के ग्रामवासियों और नगरों के नागरिकों ने मिलकर समृद्ध किया है। इसलिए इस विमर्श में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी समान भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
“हम लोग ही ‘लोक’ हैं, कोई ‘फोक’ नहीं” – गजेंद्र सिंह शेखावत
केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में बताया कि यह मुख्य आयोजन दिसंबर के पहले सप्ताह में होगा। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम एक विचार का शंखनाद करने का उत्सव है। भारत की संस्कृति ने कभी औपनिवेशिक मानसिकता को स्वीकार नहीं किया। यह आयोजन हीनता की भावना से भरे लोगों को इससे मुक्त करवाता है।”

उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कहते हुए स्पष्ट किया, “‘हम भारत के लोग’ देश के 140 करोड़ लोगों का सामूहिक, सांस्कृतिक उद्घोष है। हम लोग ही लोक हैं, कोई ‘फोक’ (Folk) नहीं।” मशीन लर्निंग के इस आधुनिक युग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास अपने पूर्वजों द्वारा दी गई ‘प्राकृत प्रज्ञा’ है। दमन के चरम काल में भी भारत की लोक कलाएं जीवित रहीं। यह आयोजन ‘लोक’ और ‘शास्त्र’ के बीच के मनभेद को मिटाने का अवसर है। उन्होंने राजस्थान को लोकमंथन के लिए सबसे उपयुक्त धरती बताते हुए, यमुना जल समझौते के लिए सीएम भजनलाल के प्रयासों की सराहना भी की।
“राजस्थान के भगीरथ बने हैं CM” – दिया कुमारी
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को “राजस्थान का भगीरथ” कहा। उन्होंने जे. नंदकुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोकमंथन का राजस्थान में आयोजन हम सभी के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा और नए संकल्प देते हैं। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए विद्यालय, परिवार व समाज सभी की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारा विज्ञान, योग परंपरा और वसुधैव कुटुंबकम ही हमारी असली पहचान है।
कार्यक्रम में दिखी राजस्थान की सतरंगी लोक संस्कृति
इस समारोह में पद्मश्री तगाराम भील विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान लोक कलाकारों ने अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसने कार्यक्रम को राजस्थान की विविध और रंग-बिरंगी लोक संस्कृति से जोड़ दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रज्ञा प्रवाह जयपुर प्रान्त के संयोजक देवेश बंसल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
