चंबल के ‘बादशाह’ का खामोश अंत: दिलचस्प लवस्टोरी, AK-47 का सस्पेंस, CM का महल उड़ाने की धमकी और 3 रुपये के लिए गोलियां… पढ़ें जगन गुर्जर की पूरी क्राइम कुंडली

अजमेर/धौलपुर (Expose Now Special): चंबल के बीहड़ों में कभी जिसके नाम से गांव के गांव खाली हो जाते थे, उस कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की कहानी का अंत अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल की एक कालकोठरी में तौलिए (गमछे) से घोंटकर कर दिया गया। देश का यह इकलौता ऐसा डाकू था जिसके एनकाउंटर की मांग सीधे देश की संसद में उठी थी।

दूध बेचने वाले एक सीधे-साधे लड़के से लेकर 128 मुकदमों वाले मोस्ट वांटेड डकैत बनने तक; 3 पत्नियों के साथ बीहड़ में प्रेम कहानी से लेकर 3 रुपये के पानी के पाउच के लिए सरेआम गोलियां चलाने तक… आइए परत-दर-परत खोलते हैं जगन गुर्जर की जिंदगी के वो पन्ने, जो अब इतिहास बन चुके हैं।

1. हत्या का वो खौफनाक दिन: ऐसे मारा गया बीहड़ का ‘शेर’

सोमवार, 29 जून 2026 का दिन राजस्थान पुलिस और जेल प्रशासन के लिए हड़कंप लेकर आया। परिंदे के भी पर न मार पाने का दावा करने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर कैदी जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई।

  • हत्यारा कौन: भरतपुर के बहुचर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड का आरोपी विष्णु, जो जगन के साथ एक ही बैरक में बंद था।
  • कैसे मारा: आपसी विवाद के बाद विष्णु ने नहाने वाले तौलिए (गमछे) से जगन का गला घोंट दिया और चंबल के एक बड़े अध्याय का हमेशा के लिए अंत कर दिया।

2. दूध बेचने वाला ‘जगन’ कैसे बना डकैत?

धौलपुर के बसई डांग इलाके के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर जन्मजात अपराधी नहीं था।

  • मंदिर के प्रसाद का विवाद (1994): उसके पिता शिवचरण गुर्जर थून स्थित लोक देवता बाबू महाराज के मंदिर में पूजा-पाठ करते थे (कहा जाता है कि जगन ने बाद में यहां कई किलो वजनी घंटा भी चढ़ाया था)। जगन खुद दूध बेचता था। 20 साल की उम्र में मंदिर कमेटी के साथ प्रसाद बांटने को लेकर पिता का विवाद हुआ। जगन ने तैश में आकर कमेटी के सदस्यों को पीट दिया। पुलिस के डर से वह बीहड़ भाग गया और डकैत मोहन गुर्जर की गैंग में शामिल हो गया।
  • जीजा की हत्या का खूनी बदला: 1994-95 में उसे पता चला कि उसके गुरु मोहन गुर्जर के रिश्तेदारों ने ही उसके जीजा की हत्या कर दी है। इसके बाद जगन ने बगावत कर दी और गुरु मोहन गुर्जर सहित जीजा के हत्यारों को मौत के घाट उतार दिया।
  • बटेश्वर में दोहरा हत्याकांड: जीजा की हत्या का बदला लेने के लिए उसने बटेश्वर गांव में दो लोगों की हत्या कर दहशत फैला दी। इसके बाद उसने अपनी पत्नी और तीन भाइयों (लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू) के साथ अपना खुद का खूंखार गैंग बना लिया।

3. दहशत के वो 10 साल: जब गांवों में नहीं बजी कोई शहनाई

2005 तक चंबल के डांग इलाके (राजस्थान, एमपी, यूपी) में जगन का खौफ इस कदर हावी था कि लोगों ने डर के मारे 10 सालों तक अपनी बेटियों की शादियां तक नहीं कीं। खुद उसके पिता को गांव छोड़कर भागना पड़ा।

  • 128 मुकदमे: जगन पर हत्या, अपहरण, लूट और रंगदारी के कुल 128 मामले दर्ज थे। इनमें से 9 मामले मध्य प्रदेश में थे। दहशत इतनी थी कि गवाह ही नहीं मिलते थे, जिसके चलते वह 78 मामलों में बरी हो चुका था।
  • CM का महल उड़ाने की धमकी (2008): भरतपुर के पीलूपुरा में गुर्जर आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर पैलेस को बम से उड़ाने की धमकी दी। उसी दिन नयापुरा हत्याकांड में भी उसका नाम आया। तब पुलिस ने उस पर 11-12 लाख रुपये का इनाम रखा था।

4. दिलचस्प लव स्टोरी और 3 पत्नियों का राज

जगन की निजी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उसकी तीन पत्नियां थीं— ममता, मुकेश और कोमेश

6. महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाना और 3 रुपये के लिए गोलियां

जेल से बाहर आने के बाद जगन सनकी हो चुका था। 2010 में बेटी की शादी में अपराध छोड़ने की कसम खाने वाला जगन छोटी-छोटी बातों पर गोलियां चलाने लगा था:

  • 3 रुपये का विवाद: बेटी के इलाज के लिए बाड़ी अस्पताल गए जगन ने पानी के 3 पाउच खरीदे। दुकानदार ने 3 रुपये खुल्ले मांगे तो उसने व्यापारियों को पीटा और सरेआम फायरिंग कर दी।
  • पंचर वाले से मारपीट: गाड़ी के टायर में हवा ठीक से न भरने और पंचर सही न बनाने पर उसने मैकेनिक को बुरी तरह पीटा।
  • जून 2019 का तांडव: 12 जून 2019 को बाड़ी के पुराने बस स्टैंड पर दिनदहाड़े फायरिंग की, बसेड़ी टोल नाके पर मारपीट की और रात में सायपुर (करन सिंह का पुरा) गांव में जाकर महिलाओं को निर्वस्त्र कर पूरे मोहल्ले में घुमाया।
  • संसद में गूंजा नाम: इसी घटना के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में जगन गुर्जर के एनकाउंटर की मांग उठाई थी।

7. अर्श से फर्श तक: नरेगा में काम नहीं मिला, CM से मांगी सुरक्षा

कभी बीहड़ का बादशाह रहा जगन अंत में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर था। उसने मीडिया को बताया था कि समाज उससे कट चुका है और उसे नरेगा (MGNREGA) में भी कोई काम नहीं दे रहा है।

  • अपनी जान को खतरा बताते हुए उसने 5 साल पहले तत्कालीन CM अशोक गहलोत और DGP को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
  • लेकिन उसकी फितरत नहीं बदली। जनवरी 2022 में उसने बाड़ी के तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को फोन पर जान से मारने की धमकी दे डाली।

8. आखिरी गिरफ्तारी और भाइयों का हश्र

जगन का पूरा परिवार ही अपराध के दलदल में धंसा है। भाई पप्पू (अजमेर जेल), लाल सिंह (भरतपुर सेवर) और पान सिंह (आजीवन कारावास, फिलहाल धौलपुर ओपन जेल) सलाखों के पीछे हैं।

आखिरी क्राइम: 21 मार्च 2026 को बाड़ी की गुर्जर कॉलोनी में जगन ने दूध लेने गई एक महिला के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। बाड़ी कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर धौलपुर जेल भेजा, जहां से हार्डकोर अपराधी होने के चलते उसे अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया था। और यहीं, 29 जून 2026 को उसके गुनाहों की फाइल हमेशा के लिए बंद हो गई।


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