जयपुर। राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बार फिर कड़ा एक्शन लेते हुए जयपुर नगर निगम के एक भ्रष्ट कर्मचारी को घूस लेते रंगे हाथों दबोचा है। एसीबी की टीम ने गुरुवार को नगर निगम में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पशुधन निरीक्षक (Livestock Inspector) सुरेंद्र कुमावत को 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार (ट्रैप) किया है।
आरोपी पशुधन निरीक्षक एक पीड़ित परिवादी से उसकी दुकान का नया व्यावसायिक लाइसेंस जारी करने की एवज में इस रिश्वत राशि की डिमांड कर रहा था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद नगर निगम मुख्यालय और संबंधित शाखा में अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया।

लाइसेंस के लिए चक्कर कटवा कर मांगी थी घूस
एसीबी मुख्यालय के अनुसार, पीड़ित परिवादी ने ब्यूरो के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसने अपनी दुकान का लाइसेंस बनवाने के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। लेकिन वहां तैनात पशुधन निरीक्षक सुरेंद्र कुमावत लाइसेंस जारी करने के बदले लगातार अवैध रूप से पैसों की मांग कर रहा था और परिवादी को परेशान कर रहा था।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से मामले का सत्यापन (Verification) करवाया। सत्यापन के दौरान आरोपी सुरेंद्र कुमावत द्वारा 6,000 रुपये की रिश्वत मांगे जाने की बात पूरी तरह सच साबित हुई।
एएसपी महावीर सिंह शेखावत के नेतृत्व में बिछाया जाल

रिश्वत की पुष्टि होते ही एसीबी के डीआईजी (DIG) डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में एक विशेष टीम तैयार की गई। इस पूरी कार्रवाई को एडिशनल एसपी (ASP) महावीर सिंह शेखावत के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
रणनीति के तहत गुरुवार को जैसे ही परिवादी ने आरोपी सुरेंद्र कुमावत को रिश्वत के 6,000 रुपये थमाए, वैसे ही पहले से घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों दबोच लिया। एसीबी की टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम मौके पर ही बरामद कर ली है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मामला दर्ज, पूछताछ जारी
ट्रैप की कार्रवाई के बाद एसीबी की टीम ने आरोपी पशुधन निरीक्षक सुरेंद्र कुमावत को हिरासत में ले लिया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसीबी की टीमें अब आरोपी के निवास स्थान और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी ले रही हैं ताकि आय से अधिक संपत्ति या अन्य संदिग्ध दस्तावेजों का पता लगाया जा सके।