जयपुर। राजस्थान सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने खनन पट्टों (Mining Leases) से खनिज परिवहन के दौरान पारदर्शिता लाने और अवैध खनन पर लगाम लगाने की दिशा में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। खान विभाग के निदेशक एमपी मीणा ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक खनन पट्टे के लिए खनिज परिवहन रवन्ना कन्फर्म करने के लिए अधिकतम 2 वे-ब्रिज (धर्मकांटे) ही मान्य होंगे। इसके अलावा जुड़े हुए अन्य सभी अतिरिक्त वे-ब्रिज को तुरंत प्रभाव से ‘डि-लिंक’ (हटाया) किया जाएगा।
5 किमी की परिधि में ही मान्य होंगे धर्मकांटे
निदेशक एमपी मीणा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अनुमत किए जाने वाले दोनों वे-ब्रिज खनन पट्टे के किसी भी सीमा स्तम्भ (Boundary Pillar) से अधिकतम 5 किलोमीटर की हवाई दूरी पर ही स्थित होने चाहिए। विभाग ने साफ किया है कि इस 5 किमी की परिधि के बाहर के धर्मकांटों को मान्य नहीं किया जाएगा। हालांकि, जिन खनन पट्टाधारकों के क्षेत्रों में अभी वे-ब्रिज नहीं लगे हैं, उन्हें राहत देते हुए 31 अगस्त 2026 तक नया वे-ब्रिज लगाने का समय दिया गया है। इस अवधि के दौरान वे अस्थाई रूप से 5 किमी से बाहर स्थित वे-ब्रिज से काम चला सकेंगे। यह कदम अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा द्वारा धर्मकांटों के ऑटोमाइजेशन और पारदर्शिता को लेकर दिए जा रहे निर्देशों के तहत उठाया गया है।
इस तरह तय होंगे मैपिंग के अधिकार
खनन पट्टों और वे-ब्रिज की मैपिंग को लेकर अधिकारियों के क्षेत्राधिकार भी तय कर दिए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- यदि 5 किमी के दायरे वाला वे-ब्रिज संबंधित खनि अभियंता (ME) या सहायक खनि अभियंता (AME) के क्षेत्राधिकार में है, तो वही इसकी मैपिंग करेंगे।
- यदि वे-ब्रिज ME/AME के क्षेत्राधिकार से बाहर है, तो उसकी मैपिंग संबंधित अधीक्षण खनिज अभियंता (SME) द्वारा की जाएगी।
- यदि इस प्रक्रिया में अधीक्षण खनिज अभियंता का क्षेत्राधिकार भी बदल जाता है, तो मैपिंग की जिम्मेदारी संबंधित अतिरिक्त निदेशक (खान-जोन) की होगी। जोन बदलने पर मैपिंग वही अतिरिक्त निदेशक करेगा, जिसके क्षेत्राधिकार में वह वे-ब्रिज वास्तविक रूप से स्थित है।
5 दिन में भौतिक और तकनीकी सत्यापन करना अनिवार्य
प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान निदेशालय के सामने यह बात आई है कि कुछ खनन पट्टों में लिंक वे-ब्रिज की संख्या ‘शून्य’ दिखाई दे रही है। इस पर निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
सभी खनिज अभियंताओं और सहायक खनिज अभियंताओं को अपने क्षेत्र के खनन पट्टों से जुड़े वे-ब्रिज की समस्त महत्वपूर्ण जानकारियों का भौतिक व तकनीकी सत्यापन (Physical and Technical Verification) करना होगा। इसके तहत वे-ब्रिज का जिला, संबंधित कार्यालय, इंस्टॉलेशन और कैलिब्रेशन की तारीख, बाट-माप सर्टिफिकेट की वैधता अवधि और लोकेशन कॉर्डिनेट्स (Location Coordinates) जैसे तथ्यों को विभागीय ऑनलाइन सिस्टम में 5 दिन के भीतर अपडेट करना अनिवार्य है। इसके बाद एक प्रमाण पत्र निदेशालय को प्रेषित करना होगा। विभाग को उम्मीद है कि इस कड़े कदम से खनिज परिवहन के क्षेत्र में लीकेज रुकेगी और पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनेगी।