जयपुर | राजस्थान में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी के मामले में राज्य चुनाव आयोग ने राजस्थान हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली है। 15 अप्रैल 2026 की निर्धारित डेडलाइन पर चुनाव न करा पाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग ने अपना पक्ष रखा। अदालत में अपना जवाब पेश करते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में हुई देरी के लिए वह सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की तरफ से समय पर जरूरी डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
‘सरकार की जिम्मेदारी है परिसीमन और आरक्षण’
राज्य चुनाव आयोग के अध्यक्ष राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा की ओर से अदालत में पेश किए गए जवाब में कहा गया कि आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर कोई अवहेलना नहीं की है। आयोग ने अपने तर्क में स्पष्ट किया कि पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं तय करना, वार्डों का परिसीमन करना और आरक्षण की अंतिम सूची जारी करना पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारी में आता है। जब तक सरकार की ओर से यह बुनियादी जानकारी और डेटा आयोग को नहीं सौंपा जाता, तब तक चुनाव आयोग अपनी चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकता।
आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि 15 अप्रैल की समय सीमा समाप्त होने से पहले ही उसकी ओर से अदालत में समय सीमा बढ़ाने के लिए एक आवेदन दायर कर दिया गया था। साथ ही, जिस पुराने केस (14 नवंबर 2025 का फैसला) का हवाला देकर यह अवमानना याचिका लगाई गई है, उस मूल केस में राज्य चुनाव आयोग पक्षकार भी नहीं था और उसे न तो कोई नोटिस मिला था, न ही आदेश की प्रति। ऐसे में आयोग पर सीधे तौर पर अवमानना का मामला नहीं बनता है।

अवमानना याचिका हुई निस्तारित
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को अवगत कराया गया कि डिवीजन बेंच पहले ही इस मामले में चुनाव कराने के लिए 31 मई 2026 तक की नई समय सीमा तय कर चुकी है। सरकार के वकीलों ने तर्क दिया कि जब अदालत द्वारा चुनाव के लिए नई डेडलाइन दी जा चुकी है, तो चुनाव में देरी को लेकर पूर्व में दायर की गई यह अवमानना याचिका अब पूरी तरह से सारहीन हो गई है।
दोनों पक्षों की दलीलों और तथ्यों को विस्तार से सुनने के बाद जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल उपमन की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की ओर से दायर की गई इस अवमानना याचिका को निस्तारित कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके साथ ही सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कहा गया था।
इन स्पष्ट आदेशों के बावजूद, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची जारी करने का अपना कार्यक्रम 22 अप्रैल तक तय कर दिया था। इस कार्यक्रम के जारी होने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी थी। उनका तर्क था कि आयोग के इस कार्यक्रम से यह साफ जाहिर होता है कि निकाय चुनाव किसी भी हाल में हाईकोर्ट द्वारा तय की गई 15 अप्रैल की समय सीमा में पूरे नहीं हो सकते हैं और यह जानबूझकर की गई अदालत की अवमानना है। हालांकि, अब नई डेडलाइन मिलने और आयोग की सफाई के बाद कोर्ट ने इस विवाद को यहीं खत्म कर दिया है।