नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में सेंध लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सीबीआई (CBI) ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार सीधे उन लोगों से जुड़ रहे हैं जिन्हें परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। सीबीआई ने अब ‘तीसरी मनीषा’ यानी फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार को पुणे से गिरफ्तार कर लिया है।
एक्सपर्ट ही निकले ‘गद्दार’, ऐसे खुली पूरी कमान:-
गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय हवलदार पुणे के ‘सेठ हीरालाल सराफ प्रशाला’ में शिक्षिका हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने खुद इन्हें NEET-UG के लिए बतौर विषय विशेषज्ञ (Expert) नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक पहुंच का फायदा उठाकर मनीषा हवलदार की पहुंच फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) के गुप्त पेपर तक हो गई।

व्हाट्सएप चैट और 40 प्रश्नों का खेल:-
जांच में सामने आया है कि पिछले महिने मनीषा हवलदार ने फिजिक्स के कई महत्वपूर्ण प्रश्न सह-आरोपी मनीषा मंधारे को भेजे थे। जब इन प्रश्नों का मिलान किया गया, तो ये हूबहू असली परीक्षा के पेपर से मेल खा गए। सूत्रों के मुताबिक, प्रोफेसर मनीषा हवलदार ने करीब 40 प्रश्नों की पूरी श्रृंखला (सीरीज) को लीक किया था। बता दें कि सह-आरोपी मनीषा मंधारे (बायोलॉजी एक्सपर्ट) को सीबीआई पहले ही 16 मई को गिरफ्तार कर चुकी है, जो बॉटनी-जूलॉजी के प्रश्नों का अनुवाद कर रही थी।
कोई डिजिटल फुटप्रिंट नहीं, रटने और ‘टिक’ लगाने का अनूठा तरीका:-
NTA से पेपर बाहर कैसे आया, इसका तरीका जानकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, लीक करने के लिए किसी हाई-टेक गैजेट या फोटो का सहारा नहीं लिया गया। “केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के इन तथाकथित प्रोफेसरों ने जो पेपर सेट किया था, उसे उन्होंने अपने दिमाग में याद (रट) कर लिया। इसके बाद घर आकर अपनी किताबों में उन प्रश्नों पर टिक (Tick) लगाया और परीक्षार्थियों को बुलाकर उन चुनिंदा सवालों को रटवा दिया। कुछ शातिर लोगों ने तो सभी प्रश्नों को अपने हाथों से लिखा, ताकि कोई डिजिटल सबूत (फुटप्रिंट) ही न छूटे।”

नेटवर्क में सबसे ज्यादा ‘डॉक्टरों के बच्चे’:-
‘Expose Now’ के हाथ लगी जानकारी के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का सबसे घिनौना सच यह है कि इस लीक नेटवर्क का फायदा उठाने वाले सबसे ज्यादा लोग खुद डॉक्टर्स हैं। पुणे के कई बड़े डॉक्टरों से जब CBI ने पूछताछ की, तब जाकर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। अब CBI इन डॉक्टरों को ही इस नेटवर्क के खिलाफ सरकारी गवाह (Witness) बनाने की तैयारी कर रही है ताकि असली मास्टरमाइंड को सख्त सजा दिलाई जा सके।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now