Expose Now Exclusive: हजारों करोड़ का भुगतान अटका, नीलामी की कगार पर ठेकेदार, ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने खोला मोर्चा— “भुगतान नहीं तो काम नहीं”

-जयपुर में 8 जून को प्रदेशभर के ठेकेदार देंगे एकदिवसीय धरना, रैली निकालकर सरकार का करेंगे ध्यानाकर्षण, सुनवाई नहीं तो करेंगे सामूहिक कार्य बहिष्कार!

जयपुर। राजस्थान में विकास की रफ्तार पर बहुत जल्द एक बड़ा ब्रेक लग सकता है। प्रदेश के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का निर्माण करने वाले ठेकेदार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं। PWD, PHED, सिंचाई विभाग, JDA, नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड सहित तमाम सरकारी विभागों के पंजीकृत ठेकेदारों का हजारों करोड़ रुपया सरकार के पास लंबे समय से दबा पड़ा है।

हालत यह हो चुकी है कि प्रदेश के ठेकेदार अब दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सोलंकी ने राज्य सरकार की लापरवाही और बजट को लेकर दिखाई जा रही उदासीनता के खिलाफ एक बेहद आक्रामक ‘खुली अपील और ध्यानाकर्षण पत्र’ जारी किया है। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार नहीं जागी, तो 8 जून को जयपुर में एक दिवसीय महाधरना और रैली निकाल का सरकार का ध्यानाकर्षण करेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार नहीं जागी को प्रदेशभर के सभी विभागों में कार्यों का सामहिक बहिष्कार किया जाएगा।

सरकारी लापरवाही: बजट को लेकर संवेदनहीनता का शिकार हुआ निर्माण क्षेत्र-

एसोसिएशन का आरोप है कि राज्य सरकार विकास कार्यों की वाहवाही लूटने में तो सबसे आगे रहती है, लेकिन जब ठेकेदारों के खून-पसीने की कमाई का भुगतान करने की बात आती है, तो खजाना खाली होने का रोना रोया जाता है।

बजट को लेकर गंभीरता का अभाव: विभागों ने ऑनलाइन सिस्टम की बाध्यता तो लागू कर दी है, लेकिन फाइलों को क्लीयर करने के लिए बजट का कोई ठोस प्रावधान या समयसीमा तय नहीं की है। महीनों तक बिल अलग-अलग स्तरों पर धूल फांकते रहते हैं।

वादाखिलाफी से आक्रोश: ठेकेदार संगठनों ने मंत्रियों से लेकर आला अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, बैठकें हुईं, लेकिन सरकार ने केवल कोरे आश्वासन दिए। धरातल पर बजट जारी करने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।

बाजार से उठाया पैसा, अब संपत्तियां हो रही हैं नीलाम;-

अपील पत्र में ठेकेदारों का दर्द साफ छलक रहा है। सरकारी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों ने अपनी निजी संपत्तियां बैंकों में गिरवी रखीं, बाजार से भारी ब्याज पर पैसा उठाया। लेकिन सरकार की तरफ से भुगतान न होने के कारण स्थिति भयावह हो चुकी है। अनेक ठेकेदारों के बैंक खाते NPA (Non-Performing Assets) हो चुके हैं। कई ठेकेदारों की निजी संपत्तियां और मकान नीलामी की कगार पर हैं, जबकि कई की संपत्तियां पहले ही नीलाम हो चुकी हैं। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान में देरी सरकार की तरफ से हो रही है, लेकिन इसके बावजूद पेनल्टी और दंडात्मक कार्रवाई ठेकेदारों पर थॉपी जा रही है, जो पूरी तरह तानाशाही है।

इन 5 बड़ी विसंगतियों ने तोड़ी ठेकेदारों की कमर:

-अंतरराष्ट्रीय महंगाई और अनुपयुक्त BSR: यूक्रेन-रूस युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के कारण डीजल, डामर, सीमेंट, लोहा और मशीनरी के दाम आसमान छू रहे हैं। लेकिन सरकार की वर्तमान BSR (Basic Schedule of Rates) जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। बाजार भाव और BSR में 20 से 30 प्रतिशत का भारी अंतर है, जिससे ठेकेदारों को सीधे तौर पर भारी नुकसान हो रहा है।

-GST डिफरेंस का अटका भुगतान: केंद्र सरकार द्वारा निर्माण कार्यों पर GST की दर 12% से बढ़ाकर 18% कर दी गई, लेकिन बढ़ी हुई 6% की अंतर राशि (GST Difference) का भुगतान विभागों ने आज तक दबा रखा है।

-एस्केलेशन क्लॉज की अनदेखी: एग्रीमेंट के क्लॉज 45 में प्राइस वेरिएशन (महंगाई के अनुसार दरें बढ़ाना) का स्पष्ट प्रावधान होने के बाद भी अधिकारी संशोधित राशि स्वीकृत करने में आनाकानी कर रहे हैं।

-एक्स्ट्रा आइटम्स की फाइलें जाम: काम के दौरान होने वाले अतिरिक्त कार्यों (Extra/Excess Items) की फाइलें सचिवालय और विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।

-लिक्विडिटी (नकद पैसे) का संकट: ठेकेदारों ने मांग की है कि कोविड काल की तर्ज पर SD (Security Deposit) राशि में 3% कटौती की व्यवस्था फिर लागू हो और पूर्व में जमा SD राशि का 75% हिस्सा तत्काल रिफंड किया जाए ताकि बाजार की देनदारियां चुकाई जा सकें।

8 जून को जयपुर में महासंग्राम: “राजनीति चमकाने का नहीं, अस्तित्व बचाने का समय”

एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सोलंकी ने प्रदेश के सभी छोटे-बड़े ठेकेदारों, जिला, संभाग और राज्य स्तर के संगठनों से तमाम आपसी मतभेद और मनमुटाव भुलाकर एक मंच पर आने का आह्वान किया है। उन्होंने साफ कहा कि “यह भ्रम मन से निकाल दें कि संकट केवल किसी एक वर्ग पर आएगा। यदि परिस्थितियां और खराब हुईं, तो न छोटा ठेकेदार बचेगा और न बड़ा। यह राजनीति चमकाने का नहीं, बल्कि अपना अस्तित्व बचाने का समय है।”

ठेकेदारों ने दो टूक संदेश दिया है कि “भुगतान नहीं तो काम नहीं”। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो निर्माण कार्यों में होने वाली देरी के लिए सिर्फ और सिर्फ सरकार जिम्मेदार होगी। 8 जून को जयपुर की सड़कों पर उतरने वाले ठेकेदारों का यह हुजूम राजस्थान सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और ठेकेदार विरोधी नीतियों की पोल खोलने के लिए तैयार है।

Share This Article
Leave a Comment