चिकित्सा विभाग में हड़कंप! अनुभवहीन अधिकारियों की नियुक्तियों के खिलाफ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र

चिकित्सा महकमे में भ्रष्टाचार का खेल? जूनियर डॉक्टरों को मलाईदार पदों पर चमकाने का आरोप, CM भजनलाल से शिकायत

जयपुर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे से भ्रष्टाचार की परतों की पोल खोलती हुई एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में चल रहे कथित ‘कदम-बढ़ाओ और पद-पाओ’ के खेल के खिलाफ अब डॉक्टरों के संगठन ने ही मोर्चा खोल दिया है। डॉक्टर वेलफेयर फेडरेशन राजस्थान ने सूबे के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, चिकित्सा मंत्री और मुख्य सचिव को एक शिकायती पत्र भेजकर विभाग में बड़े पैमाने पर चल रही अनियमितताओं को उजागर किया है।

जूनियर और गैर-अनुभवी अधिकारियों को रेवड़ी की तरह बांटे जा रहे पद

डॉक्टर वेलफेयर फेडरेशन राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. ईश्वर पंवार ने इस पूरे ढर्रे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई जिलों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (AdCMHO), डिप्टी CMHO, आरसीएचओ (RCHO) और जिला क्षय रोग अधिकारी (DTO) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रशासनिक निर्णय लेने वाले पदों पर नियमों को ताक पर रखकर जूनियर चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है। ये वो पद हैं जिनके लिए वर्षों का प्रशासनिक और फील्ड का अनुभव अनिवार्य होता है, लेकिन यहाँ अनुभवहीनता को तरजीह दी जा रही है।

निजी स्वार्थ, वित्तीय अनियमितताएं और दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं

फेडरेशन ने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इन महत्वपूर्ण कुर्सियों पर बैठे अधिकारियों में प्रशासनिक सूझबूझ की भारी कमी है। अनुभवहीनता के चलते या तो ये अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं, या फिर कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों को साधने के चक्कर में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के दलदल में लिप्त हो रहे हैं।

इसका सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है:

  • योजनाएं ठप: राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी और जनहित से जुड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम सुचारू रूप से नहीं चल पा रहे हैं।
  • लचर मॉनिटरिंग: जमीनी स्तर पर अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की मॉनिटरिंग पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
  • धूमिल होती छवि: कुछ रसूखदार और भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से पूरे चिकित्सा विभाग की छवि जनता के बीच धूमिल हो रही है।

दोषियों पर कार्रवाई और नियुक्तियां रोकने की मांग

डॉक्टर वेलफेयर फेडरेशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। फेडरेशन की मांग है कि:

  1. बिना पात्रता और अनुभव के की जा रही ऐसी सभी विवादित नियुक्तियों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  2. इन महत्वपूर्ण पदों पर केवल वरिष्ठ, योग्य और अनुभवी प्रशासनिक क्षमता वाले अधिकारियों को ही तैनात किया जाए।
  3. जूनियर डॉक्टरों को बैकडोर से मलाईदार पदों पर उपकृत करने वाले दोषी उच्च अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह है कि जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करने वाली भजनलाल सरकार इस गंभीर शिकायत के बाद चिकित्सा महकमे के इस कथित ‘सिंडिकेट’ पर क्या एक्शन लेती है।

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