-चर्चित मामले में ‘आयरन वूमेन’ के ‘सरेंडर’ के पीछे कौन सा ‘सुपर पावर’? कटघरे में बिजली महकमे की साख !
जयपुर | जयपुर डिस्कॉम इन दिनों एक ऐसे प्रमोशन और पोस्टिंग को लेकर सुर्खियों में है, जिसने महकमे के गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। कोर्ट के चक्कर काट रहे अधिशाषी अभियंता आर.के. मीणा के अचानक ‘वारे-न्यारे’ हो गए हैं। डिस्कॉम प्रशासन ने न केवल उनकी तीन-तीन लंबित चार्जशीट को एक झटके में ड्रॉप (खारिज) कर दिया, बल्कि उन्हें अधिशाषी अभियंता से पदोन्नत कर अधीक्षण अभियंता भी बना दिया है। चर्चाएं यहीं खत्म नहीं होतीं, मीणा को प्रमोशन के साथ ही सवाईमाधोपुर O&M की बेहद ‘मलाईदार’ मानी जाने वाली सीट की कमान भी सौंप दी गई है।
तीनों बिजली डिस्कॉम्स में इस समय आर.के. मीणा का यह प्रकरण सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई हैरान है कि जिन फाइलों पर सालों से धूल जमीं हुई थी, वे अचानक ‘बुलेट ट्रेन’ की रफ्तार से कैसे दौड़ने लगीं?

हाईकोर्ट पहुंचा मामला और ‘बुलेट ट्रेन’ बनी फाइलें-
इस पूरे घटनाक्रम की कहानी विभागीय पदोन्नति समिति से जुड़ी है। प्रमोशन रुकने से नाराज आर.के. मीणा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे एसीबी जांच के आदेश दे दिए थे। हालांकि, डिस्कॉम के लिए यह राहत की बात रही कि अगले ही दिन खंडपीठ ने एकलपीठ के इस सख्त आदेश पर रोक लगा दी।
लेकिन असली खेल इसी अदालती कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। कोर्ट के दखल के बाद डिस्कॉम प्रशासन में जैसे खलबली मच गई। आर.के. मीणा से जुड़ी फाइलों ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सालों का बैकलॉग चंद दिनों में साफ हो गया।

‘आयरन वूमेन’ के ‘सरेंडर’, पर्दे के पीछे की कहानी?
बिजली महकमे में अपनी सख्त छवि के लिए पहचानी जाने वाली और नियमों का हवाला देकर कड़े फैसले लेने वाली ‘आयरन वूमेन’ के इस मामले में ‘सरेंडर’ होने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर पर्दे के पीछे ऐसी क्या कहानी चलीं या ऐसा क्या दबाव था कि सालों से लंबित चल रहे प्रकरणों का निस्तारण इतनी जल्दबाजी में करना पड़ा? एक साथ 3 चार्जशीट ड्रॉप करके मीणा को वर्ष 2024 से भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से पदोन्नति दी गई है। इस जल्दबाजी ने महकमे के भीतर ही कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
क्या जानबूझकर फंसाया गया था मीणा को?
इस पूरे विवाद के बाद अब डिस्कॉम के भीतर एक नई थ्योरी भी तैर रही है। गलियारों में चर्चा है कि क्या आर.के. मीणा का प्रमोशन रोकने के लिए ही उन्हें जानबूझकर एक के बाद एक 3 चार्जशीट थमाई गई थीं? क्योंकि जैसे ही मामला कोर्ट की चौखट पर पहुंचा, डिस्कॉम बैकफुट पर आ गया और आनन-फानन में तीनों चार्जशीट ड्रॉप कर मीणा का प्रमोशन क्लीयर करना पड़ा।
वजह जो भी हो, लेकिन फिलहाल जयपुर डिस्कॉम का यह ‘पावर गेम’ पूरे प्रदेश के बिजली महकमे में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है।