पर्यटन और देवस्थान विभाग में शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, कई विभागों ने हासिल किया 100% का लक्ष्य

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘सुशासन’ पहल को धरातल पर उतारने के लिए राज्य का प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में आज पर्यटन एवं कला-संस्कृति विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी ने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि विभाग की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश भी दिए।

परिवादियों से सीधा संवाद: मौके पर सुनीं समस्याएं

निरीक्षण के दौरान शासन सचिव ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए खुद फोन संभाला और 6 अलग-अलग परिवादियों से सीधी बात की। जयपुर के निवासी महेश अग्रवाल और पुराण सिंह ने ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना’ के तहत आवेदन करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के बारे में बताया। सचिव ने तुरंत देवस्थान विभाग के अधिकारियों को पाबंद किया कि जैसे ही नई आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, इन दोनों नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर सूचित किया जाए और उनकी सहायता की जाए।

विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा: 100% निस्तारण पर दिया जोर

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। पोर्टल के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि शिकायतों के निस्तारण में कई विभागों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:

विभागकुल दर्ज प्रकरणनिस्तारित प्रकरणसफलता प्रतिशत
देवस्थान विभाग2250211794%
पर्यटन विभाग29928796%
RTDC (पर्यटन निगम)5959100%
जवाहर कला केन्द्र3838100%
आमेर विकास प्राधिकरण0606100%

अधिकारियों को कड़े निर्देश: जवाबदेही होगी तय

शुचि त्यागी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायतों के आंकड़े कम करना या पोर्टल पर शिकायत बंद करना नहीं है। उन्होंने कहा, “शिकायत का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक होना चाहिए ताकि परिवादी को वास्तविक राहत मिले।” उन्होंने लंबित मामलों के प्रभावी फॉलोअप और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री की अनूठी पहल: प्रशासन आपके द्वार

बता दें कि राज्य सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत अब हर विभाग के सचिव निर्धारित तिथियों पर स्वयं कंट्रोल रूम में बैठते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिक को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और प्रशासन के उच्चतम स्तर से उन्हें त्वरित राहत मिल सके।

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