EXPOSE NOW: बिहार में 92,133 करोड़ का ‘हिसाब’ गायब ! घोटाला या भारी लापरवाही?

जयपुर/पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन की कलई खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार ने 31 मार्च 2025 तक 92,133 करोड़ की भारी-भरकम राशि का ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (UC) जमा नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला?

सरकारी नियमों के अनुसार, जब भी सरकार किसी विकास कार्य या योजना के लिए पैसा जारी करती है, तो संबंधित विभाग को एक निश्चित समय के भीतर यह प्रमाण पत्र देना होता है कि पैसा सही जगह खर्च हुआ है। लेकिन बिहार में कहानी कुछ और ही है:

-लापता करोड़ों की राशि: कुल 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं।

-तेजी से बढ़ता आंकड़ा: 31 मार्च 2024 तक यह आंकड़ा 70,878 करोड़ था, जो महज एक साल में बढ़कर 92,000 करोड़ के पार पहुंच गया।

-नियमों की धज्जियां: बिहार ट्रेजरी कोड के नियम 271(e) के तहत 18 महीने के भीतर UC देना अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं किया गया।

CAG की चेतावनी: गबन और धांधली का खतरा!
कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी राशि का हिसाब न मिलना ‘वित्तीय अनियमितता, धन के दुरुपयोग और गबन’ की ओर इशारा करता है। “बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा उसी काम में लगा है जिसके लिए वह निकाला गया था।” — CAG रिपोर्ट का मुख्य अंश

विभाग जो ‘कटघरे’ में हैं

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा लंबित मामले इन क्षेत्रों में देखे गए हैं:

-शिक्षा विभाग

-पंचायती राज संस्थान

-ग्रामीण विकास योजनाएं

-स्वास्थ्य और समाज कल्याण

खजाना खाली होने की अटकलें:-

बिहार में बार-बार यह खबर आती है कि सरकारी खजाना खाली है। जानकारों का कहना है कि जब 92,000 करोड़ जैसी विशाल राशि का कोई लेखा-जोखा ही नहीं है, तो वित्तीय घाटा और संसाधनों की कमी होना स्वाभाविक है। विपक्ष ने इसे “सृजन घोटाले से भी बड़ा महाघोटाला” करार दिया है और सरकार से ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) की मांग की है।

मुख्य सवाल जो जनता पूछ रही है:

-अगर पैसा खर्च हुआ, तो अधिकारी रसीद (UC) दिखाने से क्यों डर रहे हैं?

-क्या यह पैसा कागजों पर विकास दिखाकर जेबों में भरा गया?

-क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे जिनकी निगरानी में यह ‘लापरवाही’ हुई?

Expose Now की नजर इस खबर पर बनी रहेगी। बिहार के विकास का पैसा आखिर गया कहां?

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